NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लवासा बैंकरप्सी : NCLT ने देनदारों को ''संगठित औद्योगिक दिवाला प्रक्रिया'' अपनाने का आदेश दिया
जनवरी तक देनदारों का लवासा और इससे संबंधित कंपनियों पर करीब 7,700 करोड़ रुपये का बकाया था।
प्रुध्वीराज रूपावत
02 Mar 2020
Lavasa

26 फरवरी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने लवासा कॉरपोरेशन लिमिटेड (LCL) और इससे संबंधित ''कंपनियों को कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी प्रोसेस (दिवालिया होने की स्थिति में चलाई जाने वाली प्रक्रिया- औद्योगिक दिवाला प्रक्रिया)'' चालू करने का आदेश दिया। 18 महीनों में कंपनी को अपनी बोली लगाने वाले पक्ष नहीं मिल सके हैं।

इस कंपनी को साल 2000 में अजित गुलाबचंद के नेतृत्व वाली ''हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड'' ने बनाया था। लवासा को महाराष्ट्र के पुणे जिले की मुल्शी और वेल्हे तहसील में एक हिल स्टेशन का निर्माण करना था। अब यह प्रोजेक्ट एक भूतिया शहर में बदल चुका है। प्रोजेक्ट पर आदिवासियों से जबरिया भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने जैसे कई आरोप लगे हैं।

इस बीच लवासा अपना उधार चुकाने में लेट-लतीफी करने लगी। जिसके चलते NCLT ने 2018 में LCL के खिलाफ़ ''इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्टसी कोड, 2016'' के तहत ''दिवाला प्रक्रिया'' चालू करने का आदेश दे दिया।जनवरी तक देनदारों का LCL और इसकी सहयोगी कंपनियों पर 7,700 करोड़ रुपये का बकाया है। NCLT के ताजा ऑर्डर के बाद, लवासा की कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स, प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी चीजों के लिए नई नीलामी करेगी। इसमें लवासा की सहयोगी ''वारसगांव पॉवर सप्लाई'' और ''दासवे रिटेल'' भी शामिल हैं। शुरू में यह दिवाला प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थीं।

NCLT ऑर्डर में लवासा के बारे में कहा गया, ''किसी स्वतंत्र प्रस्ताव की गुंजाईश नज़र नहीं आ रही है। इससे इंसॉल्वेंसी कोड के अधिकतम लाभ का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।''जब इंसॉल्वेंसी के लिए प्रस्ताव जारी किया जा रहा था, तब लवासा में HCC समूह की 68.7 फ़ीसदी, गौतम थापर के अवंथा समूह की 17.18 फ़ीसदी, वेंकटेश्वर हैचरीज़ की 7.81 फ़ीसदी और विट्ठल मनियार की 6.29 फ़ीसदी हिस्सेदारी थी।

लवासा प्रोजेक्ट करीब 12 हजार एकड़ में फैला है। मोस नदी पर बने वारसगांव बांध के किनारे, लवासा प्रोजेक्ट में 18 गांव शामिल हैं। यह प्रस्तावित किया गया था कि लवासा में रहवासी सुविधाएं और होटल बनाई जाएँगी। इसे एक टूरिस्ट प्लेस की तरह विकसित किया जाएगा।2001 में महाराष्ट्र सरकार ने लवासा को बनाने के लिए दस हजार एकड़ ज़मीन का आवंटन किया था। इसमें केवल पहले स्तर का काम ही पूरा किया गया और कई प्रोजेक्ट अब भी अधूरे हैं।

2017 में लवासा प्रोजेक्ट को गहरा धक्का लगा। उस वक्त देवेंद्र फडणवीस सरकार ने लवासा  का स्पेशल प्लानिंग अथॉरिटी का दर्जा छीन लिया और ''पुणे मेट्रोपॉलिटिन रीजन डिवेल्पमेंट अथॉरिटी'' को इसकी जिम्मेदारी दे दी।

2010 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने लवासा के निर्माण कार्य पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया था। इसका आधार पर्यावरण उल्लंघन बताया गया था। नियामक चेतावनियों के साथा-साथ लवासा का स्थानीय आदिवासियों ने भी विरोध किया है। लवासा के इलाके में आने वाले गांवों के यह आदिवासी जंगल के नुकसान और भूमि अधिग्रहण का विरोध करते रहे हैं।  नेशनल अलायंस ऑफ पीपल्स मूवमेंट इन आदिवासियों को उनकी लड़ाई में मदद करता है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Lavasa Bankruptcy: NCLT Orders Lenders to Opt for Consolidated Corporate Insolvency Process

Lavasa Construction Company
HCC
LCL
Pune hill town
BANKRUPTCY
NCLT
Ajit Gulabchand
Hindustan Construction Company
NAPM
Illegal Acquisition of Land
tribal land

Related Stories

असम: मिकिर बामुनी निवासियों के इंसाफ़ के लिए गुवाहाटी में लोगों का प्रदर्शन

क्यों IBC क़र्ज़ वसूली में बैंकों की मदद नहीं कर पाया है?

देश में एक साथ उठ खड़े हुए 500 से ज़्यादा महिला, LGBTQIA, छात्र-शिक्षक, किसान-मज़दूर संगठन

'हम अगर उट्ठे नहीं तो...': देशभर में 5 सिंतबर को 400 से अधिक महिला संगठनों का प्रदर्शन

एनएपीएम कार्यकारिणी : वक़्त की आवाज़ है, मिलकर चलो...

अंतरराष्ट्रीय आदिवासी भाषा वर्ष: हर दो हफ़्ते में एक भाषा पृथ्वी से हो रही है लुप्त

मध्य प्रदेश : आज भी जारी है नर्मदा की लड़ाई, बिना पुनर्वास हटने से इंकार

सोनभद्र आदिवासी जनसंहार : कौन है इसका ज़िम्मेदार?

झारखंड रिपोर्ट : बात निकली है... जंगल जंगल आग लगी है!

मीलॉर्ड ! क्या आदिवासियों के साथ आपने इंसाफ किया है ?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान : दलितों पर बढ़ते अत्याचार के ख़िलाफ़ DSMM का राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन
    22 Mar 2022
    दलित शोषण मुक्ति मंच(DSMM) ने पूरे प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा माँगा है और कहा राजस्थान सरकार कमजोर तबके की सुरक्षा में विफल रही है। 
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट: सुरक्षा गांरटी मिलने पर नाटो की सदस्यता पर चर्चा को तैयार यूक्रेन
    22 Mar 2022
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोमवार देर रात कहा कि वह संघर्ष-विराम, रूसी सैनिकों की वापसी और यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी के बदले में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की सदस्यता नहीं…
  • उद्धव सेठ
    यहूदियों के नरसंहार को दर्शाता उपन्यास ‘माउस’ पर प्रतिबंध सिर्फ एक पाखंड है
    22 Mar 2022
    बच्चों के लिए चित्रकथा बनाने वाले भारतीय रचनाकारों और शिक्षाविदों के मुताबिक़, टेनेसी स्कूल की ओर से लगाया गया यह प्रतिबंध बच्चों को असली ज़िंदगी की नग्नता और नस्लवाद को देखने से नहीं रोक सकता।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,581 नए मामले, 33 मरीज़ों की मौत
    22 Mar 2022
    देश में कोरोना से पीड़ित 98.74 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 70 हज़ार 515 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीरी पंडितों ने द कश्मीर फाइल्स में किए गए सांप्रदायिक दावों का खंडन किया
    22 Mar 2022
    उस वक्त की हिंसा से बचे हुए लोग इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि कैसे भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान प्रायोजित विद्रोही समूहों के कार्यों के लिए दोषी ठहराया जा रहा है और उन्हें बदनाम किया जा रहा है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License