NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
स्वास्थ्य
भारत
माइग्रेशन पर लगाम लगा पाने में असफल रही हैं सरकारें 
हाल ही में जारी हुए 2011 की जनगणना के प्रवास (माइग्रेशन) के आकड़ों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 
पुलकित कुमार शर्मा
25 Jul 2019
Migration

सभी सरकारों के लाख कोशिशों के बावजूद लोगों के माइग्रेशन में कमी नहीं आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में लोगों का तेजी से माइग्रेशन हो रहा है। हाल ही में जारी किए 2011 की जनगणना के प्रवास (माइग्रेशन) के आंकड़ों से यह बात सामने आई है। 

इन आकंड़ों के अनुसार माइग्रेशन करने वाले लोगों की संख्या में काफी बढ़ावा हुआ है। 2011 की जनगणना में माइग्रेशन कर रहे लोगों की संख्या 45.58 करोड़ हो गयी है जोकि 2001 की जनगणना में यह संख्या 31.45 करोड़ थी।

आपको बता दें कि माइग्रेशन देश की एक बड़ी समस्या है। माइग्रेशन का मूल कारण उस स्थान पर रह रहे लोगों को उन सुविधाओं का न मिल पाना जो उनकी जरूरत के साथ सीधे-सीधे जुड़ी हैं। माइग्रेशन की समस्या शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसी दूसरी मूलभूत समस्या से जुड़ी हुई है। इसी कारण गांवों से शहरों में और छोटे शहरों से बड़े शहरों की तरफ पलायन की प्रवर्ति देखी जाती है। 

2001-2011 के दशक में माइग्रेशन की दर में 45 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं, 1991-2001 के दशक में माइग्रेशन की वृद्धि दर 36 प्रतिशत थी। 1991-2001 के दशक में माइग्रेशन की वार्षिक वृद्धि दर 3.6 प्रतिशत रही थी जो 2001-2011 के दशक में बढ़ कर 4.5 प्रतिशत वार्षिक हो गयी है।

1.JPG

मनरेगा जैसे तमाम योजनाओं के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों से माइग्रेशन कर रहे लोगों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है।2001 की जनगणना में ग्रामीण क्षेत्रों से माइग्रेशन कर रहे लोगों की संख्या 21.04 करोड़ थी। 2011 की जनगणना में ये आंकड़ा बढ़ कर 27.82 करोड़ हो गया है। 1991-2001 के दशक में माइग्रेशन वृद्धि दर 29 प्रतिशत दर्ज की गयी थी जबकि 2001-2011 के दशक में माइग्रेशन की वृद्धि दर 32 फीसदी है।  

शहरी क्षेत्रो में माइग्रेशन वृद्धि दर में भी बड़ा अंतर देखने को मिला है। 1991-2001 के दशक में माइग्रेशन की वृद्धि दर 50 प्रतिशत थी जबकि 2001-2011 के दशक में माइग्रेशन की वृद्धि दर 70 प्रतिशत हो गयी है। 2001 के शहरी क्षेत्रों में यह संख्या 10.42 करोड़ थी जोकि 2011 की जनगणना में बढ़ कर 17.76 करोड़ हो गयी है।  

आंकड़ों के अध्ययन के बाद आप देखेंगे कि ग्रामीण क्षेत्रों से माइग्रेशन कर रहे लोगों की दशक में वृद्धि दर शहरी क्षेत्रों से माइग्रेशन कर रहे लोगों से कम हैं लेकिन अगर संख्या में देखे तो ग्रामीण क्षेत्रो से माइग्रेट कर रहे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। यह लगभग दोगुना है।

पुरुषों व महिलाओं का माइग्रेशन 

अगर हम पुरुषों व महिलाओं के हिसाब से माइग्रेशन की रिपोर्ट को देखें तो महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा माइग्रेट हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुल 45.58 करोड़ लोगों का माइग्रेशन हुआ। इसमें 14.61 करोड़ पुरुष और 30.96  करोड़ महिलाएं हैं। 

2001-2011 के दशक में पुरुषों की माइग्रेशन की वृद्धि दर 57 प्रतिशत है। 2001-2011 के दशक में स्त्रियों की माइग्रेशन वृद्धि दर 40 प्रतिशत है। हांलाकि स्त्रियों की माइग्रेशन दर कम है परन्तु संख्या में पुरुषों की संख्या के मुकाबले दो गुना है।

2.JPG
महिलाओं के माइग्रेशन की इतनी ज्यादा संख्या विवाह के चलते हैं। कुल महिलाओं का लगभग 45 फीसदी माइग्रेशन विवा​ह के कारण हुआ है।  

राज्य के भीतर माइग्रेशन

2011 की जनगणना के अनुसार 39.57 करोड़ लोग राज्य के भीतर ही माइग्रेशन हुआ है। अगर हम कुल माइग्रेशन के हिसाब से देखें तो 86.8 प्रतिशत लोग राज्य के भीतर ही माइग्रेट हुए हैं। 26.03 करोड़ लोग ग्रामीण क्षेत्रों से माइग्रेट हुए हैं जबकि शहरों से 8.54 करोड़ लोगों का माइग्रेशन हुआ है। 

3_0.JPG

राज्य के भीतर ग्रामीण क्षेत्रों से 2001-2011 के दशक में माइग्रेशन की वृद्धि दर 1991-2001 के दशक में माइग्रेशन की वृद्धि दर के बराबर रही लेकिन शहरों क्षेत्रो में 2001-2011 के दशक में माइग्रेशन की दर 131 प्रतिशत है जोकि 1991-2001 के दशक में माइग्रेशन की वृद्धि दर से बहुत अधिक हैं।

राज्य से दूसरे राज्यों के बीच माइग्रेशन 

2001-2011 के दशक में माइग्रेशन कर रहे लोगों की वृद्धि दर 1991-2001 के दशक के मुकाबले कम है। 2001-2011 के दशक में माइग्रेशन दर 32 प्रतिशत है जबकि 1991-2001 के दशक में यह दर 54 प्रतिशत थी। अगर संख्या में देखा जाए तो 2011 में यह 5.43 करोड़ हो गयी है जबकि 2001 में यह संख्या 4.12 करोड़ थी।

4.JPG

2001-2011 के दशक में ग्रामीण क्षेत्रों में माइग्रेशन की वृद्धि दर 1991-2001 के दशक के मुकाबले कम हुई है। 1991-2001 के दशक में यह दर 178 प्रतिशत थी जबकि 2001-2011 के दशक में वृद्धि दर सिर्फ 20 फीसदी ही है। संख्या में अगर हम बात करें तो 2001 में यह 2.64 करोड़ थी जोकि 2011 में बढ़ कर 3.16 करोड़ हो गयी है।

हालांकि शहरी क्षेत्रों में यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों के बिल्कुल उलट है। शहरों में 1991-2001 के दशक में माइग्रेशन वृद्धि दर (-26 %) नकारात्मक थी जबकि 2001-2011 के दशक में बढ़ कर 56 प्रतिशत हो गयी है। हालांकि संख्या के तौर बहुत अंतर नहीं आया है। 2001 में यह 1.26 करोड़ थी जोकि 2011 में बढ़ कर 1.97 करोड़ हुई है।

माइग्रेशन का प्रमुख कारण संसाधनों का असमान वितरण है। कुछ जगहों के विकास पर सरकारों ने ध्यान दिया तो वहीं कुछ जगहों पर विकास की बयार  पहुंची ही नहीं है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। इसी कारण आंकड़ों में बड़ी संख्या में फेरबदल नजर आ रहा है। अपने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बड़ी संख्या में लोग माइग्रेट कर रहे हैं। 

फिलहाल 2021 की जनगणना अभी होनी है। फिर नए आंकड़े जारी किए जाएंगे। देखना यह है कि नए आंकड़े क्या बताते हैं? सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह निकल कर आता है कि क्या इतनी बड़ी संख्या में लोग माइग्रेट करते रहेंगे या फिर सरकारें इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगी।  

 

migration
permanent migration
temporary migration
UNEMPLOYMENT IN INDIA
health facilities in rural areas
india population
census 2011
population census

Related Stories

बेसहारा गांवों में बहुत बड़ा क़हर बनकर टूटने वाला है कोरोना

अगर ‘ये सरकार ग़रीबों की है’, तो दिहाड़ी मज़दूरों की आत्महत्याएं क्यों बढ़ रहीं हैं?

क्या आज बेरोज़गारी पर बात न करना देश के 135 करोड़ लोगों की अवमानना नहीं है!

रोजगार के अभाव में दो तिहाई मज़दूर वापस शहर लौटना चाहते हैं: सर्वे

प्रवासी का मतलब और पीड़ा समझते हैं आप?

पिछले साल 3,05,000 से अधिक श्रमिकों ने म्यांमार से पलायन किया

हरियाणा चुनाव : प्रवासी श्रमिक आर्थिक रूप से टूटा और राजनीतिक रूप से शक्तिहीन है

आर्थिक मंदी की आड़ में श्रमिकों के खिलाफ साज़िश!

बेरोज़गारी दर में अप्रत्याशित वृद्धि

झारखंड : लोकसभा चुनाव : प्रवासी मजदूरों का दर्द नहीं बन सका मुद्दा


बाकी खबरें

  • विकास भदौरिया
    एक्सप्लेनर: क्या है संविधान का अनुच्छेद 142, उसके दायरे और सीमाएं, जिसके तहत पेरारिवलन रिहा हुआ
    20 May 2022
    “प्राकृतिक न्याय सभी कानून से ऊपर है, और सर्वोच्च न्यायालय भी कानून से ऊपर रहना चाहिये ताकि उसे कोई भी आदेश पारित करने का पूरा अधिकार हो जिसे वह न्यायसंगत मानता है।”
  • रवि शंकर दुबे
    27 महीने बाद जेल से बाहर आए आज़म खान अब किसके साथ?
    20 May 2022
    सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान अंतरिम ज़मानत मिलने पर जेल से रिहा हो गए हैं। अब देखना होगा कि उनकी राजनीतिक पारी किस ओर बढ़ती है।
  • डी डब्ल्यू स्टाफ़
    क्या श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट की तरफ़ बढ़ रहा है बांग्लादेश?
    20 May 2022
    श्रीलंका की तरह बांग्लादेश ने भी बेहद ख़र्चीली योजनाओं को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर विदेशी क़र्ज़ लिए हैं, जिनसे मुनाफ़ा ना के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीलंका में जारी आर्थिक उथल-पुथल…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...
    20 May 2022
    आज देश के सामने सबसे बड़ी समस्याएं महंगाई और बेरोज़गारी है। और सत्तारूढ़ दल भाजपा और उसके पितृ संगठन आरएसएस पर सबसे ज़्यादा गैर ज़रूरी और सांप्रदायिक मुद्दों को हवा देने का आरोप है, लेकिन…
  • राज वाल्मीकि
    मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?
    20 May 2022
    अभी 11 से 17 मई 2022 तक का सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का “हमें मारना बंद करो” #StopKillingUs का दिल्ली कैंपेन संपन्न हुआ। अब ये कैंपेन 18 मई से उत्तराखंड में शुरू हो गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License