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भारत
राजनीति
मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं की गिरफ्तारी के पीछे का सच
ये गिरफ्तारियाँ हिंदुत्व समर्थक हिंदुत्व आतंकवादी गतिविधियों के बढ़ते सबूतों से ध्यान हटाने का प्रयास है जो सनातन संस्था और उसके सहयोगियों का समर्थन करते हैं और भीम कोरेगांव के बाद हुई हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों की रक्षा करते हैं।
सुबोध वर्मा
30 Aug 2018
Translated by महेश कुमार
Urban Naxals

पाँच मानव अधिकार कार्यकर्त्ताओं की गिरफ्तारी पुणे पुलिस द्वारा एक गलत तरीके का प्रयास है - वह भी राज्य सरकार की मंजूरी के साथ। यह सारा प्रपंच लोगों और मीडिया का ध्यान इस ओर से हटाने के लिए रचा गया है कि कैसे पुणे पुलिस हिंदू आतंक ही जाँच और उसके खिलाफ़ कदम उठाने में असफल रही हैI

याद रखें कि तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर को 20 अगस्त 2013 को और 16 फरवरी, 2015 को वाम नेता गोविंद पंसारे को गोली मार दी गई थी - दोनों महाराष्ट्र में। 2017 में गौरी लंकेश की हत्या की जाँच के तथ्यों से यह बाहर आया कि हिंदू कट्टरपंथी संगठनों के 5-6 राज्य में फैला नेटवर्क इसके लिए ज़िम्मेदार है (और 2015 में कलबुर्गी की हत्या के भी)I सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप कर जाँच को महाराष्ट्र में बढ़ाया, फिर भी पुणे पुलिस अपनी धीमी चाल चल रही थी जबकि कर्नाटक पुलिस उनसे पूरी चीज को और गंभीरता से लेने के लिए कह रही थी।

लेकिन यह सिर्फ पुलिस की बात नहींI यह देश के ध्यान को हटाने के लिए राजनीतिक उच्च नेताओं द्वारा स्वीकृत एक बड़े षड्यंत्र की कहानी है जो अपने हिंसक और आतंकवादी गतिविधियों को और अधिक से अधिक साक्ष्य के साथ, सनातन  संस्थान और उसके सहयोगियों की भागेदारी की गाथा को देख रहा है।

चार विरोधी सांप्रदायिक प्रगतिशील विचारकों की हत्याओं की जाँच में यह पता चला है कि पूरी तरह से हिंदुत्व संगठित और वित्त पोषित आतंकवादी नेटवर्क की हिट सूचियों में इन लोगों का नाम था, और वे लोग  हथियार और गोला बारूद, बम, जहर पैकेट इत्यादि के साथ पुरी तरह से हमले की तैयारी में थे और कई खुफिया और सुरक्षित घरों में फैले थे। उनके प्रशिक्षण शिविर थे (जालना में एक फार्महाउस में) जहाँ हथियारों के उपयोग को सिखाया जाता था। सिनेमाघरों, संगीत त्यौहार इत्यादि सहित सार्वजनिक स्थानों पर बम लगाने के लिए योजनाएँ और नक्शे थे। अब भी रिपोर्टें हैं कि ये संगठन कॉलोनियों/क्षेत्रों में बम लगाकर सांप्रदायिक दंगों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे थे जहाँ एक समुदाय हिंसक प्रतिक्रिया को उकसाता था। सनातन संस्था और उसके सहयोगियों के कई सदस्यों पर बमबारी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के अतीत में आरोप लगे हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि आरएसएस और बीजेपी के सदस्य इन हिंदुत्व समूहों की बैठकों और सम्मेलनों में भी शामिल होते थे। यह भी संभव है कि भविष्य की जाँच इस नेटवर्क को और प्रकट कर सकती है।

 न्यूज़क्लिक से बात करते हुए प्रसिद्ध पत्रकार निखिल वाग्ले ने कहा, "लोगों और मीडिया के ध्यान को ध्यान में रखकर सनातन संस्थान की साज़िश से ध्यान हटाने का स्पष्ट प्रयास है।"

वाग्ले ने इंगित किया कि पुणे पुलिस भीम कोरेगांव मामले पर दबाव में है क्योंकि जून में पाँच कार्यकर्त्ताओं की पिछली गिरफ्तारी और इस सिद्धांत के अनुसार कि वे इस वर्ष 1 जनवरी को भीम कोरेगांव की 200वीं वर्षगांठ पर हुई हिंसा को उत्तेजित करने में शामिल थे, किसी भी ठोस सबूत से प्रमाणित नहीं किया गया है।

"पुणे पुलिस को गिरफ्तारी के बाद 90 दिनों के भीतर (पहले) पाँच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट जमा करनी है। वह समय सीमा 6 सितंबर को समाप्त हो जाएगी। मैंने सभी केस पेपर की समीक्षा की है और उनके खिलाफ कुछ भी मामला नहीं बनता है। इसलिए, निराशा में, पुलिस ने इन नई गिरफ्तारी को किसी भी तरह से मामले को हल करने और मजबूत करने के लिए बनाया है," वाग्ले ने कहा।

इस बीच, यहाँ एक अन्य पहेली है जो पाँच कार्यकर्त्ताओं की गिरफ्तारी को भीमा कोरेगांव हिंसा से जोड़ती है: हिंदू कट्टरपंथी तुषार दमगुद, जिसकी विश्रमबाग पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी है, जिस आधार पर कार्यकर्त्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, वह संभा जी भिड़े एक स्पष्ट समर्थक है और उन दो लोगों में से एक है जिसने हिंसा को उक्साने मैं भुमिका अदा की थी। भेद अभी भी बड़े हैं और पुणे पुलिस को गिरफ्तार करने में सक्षम नहीं होने के कारण सुप्रीम कोर्ट से डांट की झाड पड रही थी। दम्गुदे कम्युनिस्टों के लिए शत्रुतापूर्ण रुख रखता है और नियमित रूप से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ बोलता है। उन्होने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ फोटो भी खिंचवाया हुआ है।

तो, पुणे पुलिस, और राज्य सरकार को लगता है कि वह हिंदुतव लॉबी को जंगली आरोपों के आधार पर वामपंथी कार्यकर्त्ताओं (अब और पहले वाले) को गिरफ्तार कर उन्हे प्रसन्न करने की कोशिश कर रही है, जबकि उसने भीम कोरेगांव में, भिड़े में और दो अन्य आरोपीयों में से एक को भी पकड़ने की उपेक्षा की है। अन्य आरोपी मिलिंद एकबोट को गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन अब वह जमानत पर है।

मेघा पंसारे, वाम नेता गोविंद पंसारे जिनकी भी हत्या कर दी गई थी, की बहू ने भी महसूस किया कि ये गिरफ्तारी मामले पर पर्दा डालने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने न्यूजक्लिक को बताया कि यह संभव है कि इन गिरफ्तारी के माध्यम से, सनातन संस्था और उसके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे खुलासे से राजनीतिक ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।

महाराष्ट्र के दलित नेता प्रकाश अम्बेडकर का मानना है कि अविश्वसनीय सबूत हैं कि हिंदु इलाकों में बम विस्फोट करने की योजना बनाने वाले सनातन संस्था भी मुसलमानों पर हमलों को उकसाएंगे। यह बीजेपी की फडणवीस सरकार को उलझन मै डाल रही है। महाराष्ट्र की एक बहुत मुश्किल स्थिति में है। इसलिए, वाम  उदारवादी कार्यकर्त्ताओं पर इस पर ध्यान आकर्षित करने के लिए वर्तमान गिरफ्तारी की हैं।

"कर्नाटक सरकार अब कुछ समय से महा सरकार पर जाँच के दौरान संस्थान और उसके कार्यों पर एकत्र किए गए साक्ष्य के आधार पर कार्यवाही करने के लिए दबाव डाल रही है। उन्होंने पाया कि संस्थान स्वयं मुंबई में कई जगहों पर उपयोग के लिए बम तैयार कर रहा था, और इनमें से कई हिंदू जगह हैं और अल्पसंख्यक कब्जे वाले इलाके नहीं थे। फडणवीस सरकार के लिए इसे स्वीकार करने से संस्था को हिंदू विरोधी पार्टी घोषित किया जाएगा कि जिसे बीजेपी स्पष्ट करने को तैयार नहीं है। इसलिए उन्होंने सभी अल्ट्रा-वामपंथी बुद्धिजीवियों को संस्थान से ध्यान हटाने और अपने षड्यंत्र सिद्धांत का समर्थन करने के लिए कि चरम वामपंथी बौद्धिकों से देश को खतरा है जो अपने दावों के अनुसार हिंसा का समर्थन कर रहे हैं। "अम्बेडकर ने सिटीजन से कहा।

महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (एमएएनएस) के अविनाश पाटिल, तर्कसंवादी दाभोलकर द्वारा स्थापित संगठन ने न्यूज़क्लिक को यह भी बताया कि इन कार्यकर्त्ताओं को गिरफ्तार करना शायद संभवतः सनातन संस्था के खुलासे से ध्यान हटाने का प्रयास था, हालांकि अभी तक इसका कोई सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि एम.ए.एस.एस. 2000 से सनातन संस्था और इसके संगठन की गतिविधियों को लगातार सरकारों को चेतावनी दे रहे हैं। इसे नजरअंदाज कर दिया गया था। अब, वास्तविकता का खुलासा किया गया है।

चूंकि गिरफ्तार लोगों के खिलाफ सबूत मौजूद नहीं हैं, इसलिए अंततः मामले असफल हो रहे हैं। लेकिन इस बीच, बीजेपी/आरएसएस और इसके संगठन को वैकल्पिक 'सत्य' को उनके अपने विश्वसनीय मीडिया के साथ मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

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