NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
शिक्षा
भारत
राजनीति
मिड डे मील की गुणवत्ता पर लगातार उठते सवाल
हम अभी भी हमारे गरीब बच्चों को एक अच्छा और पौष्टिक आहार मुहैया कराने में पिछड़ रहे हैं जबकि दावा तो यह है कि हम जल्दी ही दुनिया की एक महाशक्ति बनने जा रहे हैं।
सरोजिनी बिष्ट
24 Jul 2019
Mid day meal
image courtesy: Newslaundry

लाख दावे होने के बावजूद आज भी मिड डे मील यानी मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर सवाल बना हुआ है, जो यह दिखाता है कि हम अभी भी हमारे गरीब बच्चों को एक अच्छा और पौष्टिक आहार मुहैया कराने में पिछड़ रहे हैं जबकि दावा तो यह है कि हम जल्दी ही दुनिया की एक महाशक्ति बनने जा रहे हैं।

पिछले दिनों मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने यह जानकारी दी कि विगत 3 वर्षों के दौरान मिड डे मील का भोजन खाने से देशभर में लगभग 930 बच्चे बीमार हुए। मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस अवधि के दौरान भोजन की घटिया गुणवत्ता के संबंध में 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उन्हें 35 शिकायतें मिली।

एक साधारण सी समझ भी इतना हिसाब तो लगा ही सकती है कि वर्षों बाद भी जब हम एक लाभकारी योजना का स्तर सुधारने में पिछड़ रहे हैं तो भला हम महाशक्ति बनने का दावा कैसे कर सकते हैं। क्या महाशक्ति का पैमाना इतना भर है कि हम कितना परमाणु क्षमता से लैस हैं या हमने कितने डॉक्टर इंजीनियर और साइंटिस्ट पैदा किए या हमने कितने सड़क मार्ग या रेल मार्गों को ईजाद किया। 
मिड डे मील योजना का आंकलन गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को केवल स्कूल तक लाने के नजरिए से नहीं किया जा सकता बल्कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में पौष्टिक आहार से वंचित बच्चों को नियमित तौर पर एक ऐसा आहार उपलब्ध कराने के रूप में भी देखा जाना चाहिए जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास में भी लाभकारी सिद्ध हो। इतना ही नहीं यह एक ऐसी योजना जो सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देती है क्योंकि जब विभिन्न धर्म जाति वर्ग के बच्चे एक साथ बैठकर एक जैसा भोजन ग्रहण करते हैं तो निश्चित यह पद्धति सामाजिक एकता और समरसता को बढ़ावा देती है।

इसके  साथ ही इस योजना के कारण लैंगिक अंतराल को भी काफी हद तक कम किया गया जो परिवार अपनी बेटियों को बेटों के मुकाबले स्कूल कम भेजते थे या पढ़ाई बीच में ही छुड़वा देते थे। इस योजना के कारण दूर दराज के ग्रामीण इलाकों में भी लोग अपनी बेटियों को पढ़ने भेजने लगे। तो कुल मिलाकर योजना ने एक अच्छे उद्देश्यों को जन्म तो दिया लेकिन जिस प्रकार अक्सर इसमें कमियां निकलती जा रही है, चाहे वह भोजन की गुणवत्ता को लेकर हो या साफ सफाई की बात हो, उसने एक निराशा पैदा की है।

इसमें दो मत नहीं कि मिड डे मील के दौरान मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता समय-समय सवालों के घेरे में आती रही है और हर साल इसकी वजह से बच्चों के बीमार पड़ने की खबरें भी सुर्खियों में रहती हैं। इतना ही नहीं हद तो तब हो जाती है जब खाने में कभी चूहा कभी छिपकली और तो और सांप तक मिलने की खबरें आती हैं। इसी साल फरवरी में महाराष्ट्र के एक स्कूल में उस समय हड़कंप मच गया जब मिड डे मील में बनी खिचड़ी में सांप निकल आया। ऐसी घटनाओं से स्वाभाविक है हम दोबारा लौटकर उस स्थिति में चले जाते हैं जहां से हम बड़े जद्दोजहद से निकल रहे हैं।

आंकड़े बताते हैं कि आज भी भारत में करीब 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं । वैश्विक भुखमरी सूचकांक में दुनिया के 119 देशों में भारत 103वें स्थान पर है। यहां तक कि भारत दुनिया के उन 45 देशों में शामिल है जहां भुखमरी काफी गंभीर स्तर पर है। सरकारी स्कूलों में आने वाले अधिकांश बच्चे इन्हीं गरीब परिवार के होते हैं। सुख सुविधाओं से वंचित, अभाव में  जीते यही बच्चे कुपोषण के भी शिकार ज्यादा होते हैं यदि प्रत्येक दिन उन्हें एक समय पौष्टिक आहार मिल जाए तो काफी हद तक कुपोषण पर लगाम लगाई जा सकती है। हालांकि केंद्र सरकार भी मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता सुधारने और उसके संचालन में लापरवाही और गड़बड़ी रोकने की ओर ठोस कदम बढ़ाने को अपनी पहली प्राथमिकता कहती रही है बावजूद इसके भोजन की खराब क्वालिटी और संचालन में गड़बड़ी की ख़बरें आती ही जा रही हैं। 

 हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मिड डे मील योजना ने एक ऐसी दिशा में भी कारगर काम किया जब गरीब वर्ग के कई बच्चे या तो पढ़ने ही नहीं जाते थे या बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके होते थे पर इस योजना में ऐसे तमाम वंचित और ड्रॉप आउट बच्चों को भी स्कूल तक लाने में अपनी ठोस भूमिका निभाई पर लगातार इसकी गुणवत्ता पर उठते सवालों और बीमार पड़ते बच्चों की खबरें एक संशय कि ओर इशारा भी करती हैं कि कहीं हम दोबारा उसी पुरानी स्थिति में न पहुंच जाए। 
   

mid day meal
Nutrition
malnutrition in children
school children
poverty
HRD

Related Stories

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

हम भारत के लोग : इंडिया@75 और देश का बदलता माहौल

हम भारत के लोग : हम कहां-से-कहां पहुंच गये हैं

संविधान पर संकट: भारतीयकरण या ब्राह्मणीकरण

हम भारत के लोग:  एक नई विचार श्रृंखला

कभी रोज़गार और कमाई के बिंदु से भी आज़ादी के बारे में सोचिए?

गोल्ड लोन की ज़्यादा मांग कम आय वाले परिवारों की आर्थिक बदहाली का संकेत

बैठे बैठे बोर हुए करना है कुछ काम, चलो राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं...

आज तो मूल्यांकन का दिन था, लेकिन तमाशे में बीत गया...

इस बार ख़ुद मोदी जी ने क्यों नहीं की तीसरे लॉकडाउन की घोषणा?


बाकी खबरें

  • Auroville
    सत्यम श्रीवास्तव
    विकास की बलि चढ़ता एकमात्र यूटोपियन और प्रायोगिक नगर- ऑरोविले
    16 Dec 2021
    ऑरोविले एक ऐसा ही नगर है जो 1968 से धीरे-धीरे बसना शुरू हुआ। इस छोटे से नगर को पूरी दुनिया में एक प्रायोगिक शहर के तौर पर देखा जाता है। इस नगर को यूटोपियन यानी सुंदर कल्पना के तौर पर भी पूरी दुनिया…
  • Milind Naik
    राज कुमार
    यौन शोषण के आरोप में गोवा के मंत्री मिलिंद नाइक का इस्तीफ़ा
    16 Dec 2021
    महिला के यौन शोषण के आरोप के चलते भाजपा नेता और गोवा के शहरी विकास और समाज कल्याण मंत्री मिलिंद नाईक को इस्तीफा देना पड़ा है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया कि मिलिंद नाइक का इस्तीफा…
  • bank strike
    रूबी सरकार
    निजीकरण को लेकर 10 लाख बैंक कर्मियों की आज से दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल
    16 Dec 2021
    बैंक कर्मियों की इस हड़ताल का समर्थन बीमा कर्मचारियों ने भी किया है। किसान आंदोलन की सफलता के बाद अब श्रमिक संगठनों को भी उम्मीद जगी है।
  • Nirbhaya
    सोनिया यादव
    निर्भया कांड के नौ साल : कितनी बदली देश में महिला सुरक्षा की तस्वीर?
    16 Dec 2021
    हर 18 मिनट में बलात्कार का एक मामला, निर्भया कांड के न्यायिक नतीजे से आने वाले व्यापक सामाजिक बदलावों की उम्मीद पर कई सवाल खड़े करता है।
  • Van Gujjar community
    प्रणव मेनन, तुइशा सरकार
    उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क में वन गुर्जर महिलाओं के 'अधिकार' और उनकी नुमाइंदगी की जांच-पड़ताल
    16 Dec 2021
    वन गुर्जर समुदाय के व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार के आलोक में समुदाय की महिलाओं के अधिकार
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License