NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
सरकार की मज़दूर विरोधी नीति को लेकर देशभर में निर्माण मज़दूरों का प्रदर्शन
प्रदर्शन में मौजूद सभी मज़दूरों ने एक स्वर में सरकार से राहत की मांग की और मांग न माने जाने पर एकजुट होकर संघर्ष करने की भी बात कही।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Nov 2019
CONSTRUCTION WORKERS PROTEST

20 नवंबर को दिल्ली के विभिन्न ज़िला श्रम कार्यालयों पर ऐक्टू(एआईसीटीयू) से संबद्ध यूनियनों ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन ऐक्टू व ऑल इंडिया कंस्ट्रक्शन वर्कर्स फ़ेडरेशन (एआईसीडबल्यूएफ़) के द्वारा आयोजित देशव्यापी विरोध दिवस के तहत दिल्ली समेत देश के तमाम राज्यों में किया गया। प्रदर्शन मुख्यतः मोदी सरकार द्वारा श्रम-क़ानूनों को ख़त्म करने, बेरोज़गारी-महंगाई पर रोक लगाने में असमर्थ होने, और संघ-भाजपा द्वारा फैलाई जा रही सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ किया गया।

यूनियन नेताओं ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वो आर्थिक मंदी, बेरोज़गारी और मंहगाई से ध्यान हटाने के लिए पूरे देश को धर्म-संप्रदाय के नाम पर बांट रही है।

AICWF 1.jpg

दिल्ली के उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी, पूर्वी, उत्तर-पूर्वी, दक्षिणी इत्यादि ज़िलों के उप-श्रमायुक्त कार्यालयों पर सैकड़ों मज़दूरों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया और ज्ञापन सौंपा। दक्षिणी दिल्ली के पुष्प भवन श्रम कार्यालय में प्रदर्शनकारी मज़दूरों को ऐक्टू दिल्ली के अध्यक्ष संतोष रॉय ने संबोधित किया। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार देश के ग़रीबों को, मज़दूरों को बांट देना चाहती है। वो चाहती है कि ग़रीब और मज़दूर धर्म के नाम पर लड़ते रहें और सरकार चुपचाप देश को अडानी-अम्बानी-टाटा के हाथों बेच दे। निर्माण मज़दूरों का वेलफ़ेयर बोर्ड ख़त्म करके और श्रम क़ानूनों का सफ़ाया करके मोदी सरकार मज़दूरों को बदहाली की ओर धकेल रही है, हमें इसका डटकर मुक़ाबला करना होगा।" 

ग़ौरतलब है कि संघ से जुड़े 'बीएमएस' को छोड़कर तमाम केंद्रीय ट्रेड यूनियनें लगातार मज़दूरों के अधिकारों पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है।

"श्रम-क़ानूनों को कोड बिल लाकर ख़त्म करना, मज़दूरों को ग़ुलाम बनाने की साज़िश है!"

पूर्वी और उत्तर पूर्वी ज़िले में काम करने वाले श्रमिकों ने झिलमिल कॉलोनी स्थित उप-श्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। यहां उपस्थित मज़दूरों ने एक सुर में मोदी सरकार द्वारा निर्माण मज़दूरों के कल्याण के लिए बने क़ानूनों के साथ हो रही छेड़छाड़ का विरोध किया। अपनी बात रखते हुए निर्माण कार्य करने वाले एक मज़दूर ने बताया कि "कई बार कार्य स्थलों पर दुर्घटनाएं हो जाती हैं, जूते घिसने के बावजूद न तो हमे मुआवज़ा मिलता है और ना ही मालिक को सज़ा। जब श्रम क़ानून रहते हुए ये हालात हैं, तो इनके ख़त्म हो जाने से तो मज़दूर ग़ुलाम बनकर रह जाएगा।" 

धरनास्थल पर मौजूद मज़दूरों को संबोधित करते हुए ऐक्टू दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष वी.के.एस गौतम ने बताया कि आने वाली 8 जनवरी 2020 को इन्ही मुद्दों को लेकर, संयुक्त ट्रेड यूनियनों द्वारा देशव्यापी हड़ताल का आह्वान है। उन्होंने हड़ताल में पूरी ताक़त लगाने की बात कही और धर्म-संप्रदाय से ऊपर उठकर आंदोलन को व्यापक बनाने पर ज़ोर दिया।

AICWF 2.jpg

 

निर्माण-कार्य पर लगी रोक से बेरोज़गार हो रहे हैं लाखों निर्माण मज़दूर!

एक ओर तो निजी वाहनों से लगने वाले जाम और प्रदूषण से सभी दिल्ली वाले परेशान हैं, वहीं बिना वैकल्पिक रोज़गार या बेरोज़गारी भत्ते की घोषणा के लगातार निर्माण-कार्य पर चल रही रोक से लाखों मज़दूर बेरोज़गार हो गए हैं। उत्तरी व उत्तर-पश्चिमी ज़िले में स्थित श्रम कार्यालय पर भी धरने में कई मज़दूरों ने हिस्सा लिया। मूलतः बिहार से आने वाले, राजीव कुमार पंडित, जो कि स्वयं मिस्त्री का काम करते हैं और 'बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन' के अध्यक्ष हैं ने बताया, "मज़दूर वर्ग बढ़ रहे प्रदूषण के चलते तो परेशान है ही, प्रदूषण रोकने के नाम पर हो रही काम-बन्दी से उसके भूखों मरने की नौबत आ गई है। राजीव ने बताया कि पिछले साल भी काम बंद होने के चलते मज़दूरों की स्थिति काफ़ी ख़राब हो गई थी।"

प्रदर्शन में मौजूद सभी मज़दूरों ने एक स्वर में सरकार से राहत की मांग की और मांग न माने जाने पर एकजुट होकर संघर्ष करने की भी बात कही। अपनी इन्हीं मांगों को लेकर देश के तमाम मज़दूर 8 जनवरी को हड़ताल पर भी जा रहे हैं।

 

CONSTRUCTION WORKERS PROTEST
workers protest
India
pollution
AICCTU
labor laws
labor

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे

दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च

दिल्ली: कोविड वॉरियर्स कर्मचारियों को लेडी हार्डिंग अस्पताल ने निकाला, विरोध किया तो पुलिस ने किया गिरफ़्तार


बाकी खबरें

  • bihar
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार में नवजात शिशुओं के लिए ख़तरनाक हुआ मां का दूध, शोध में पाया गया आर्सेनिक
    27 Feb 2022
    “बिहार के जिन 6 जिलों में मां के दूध में आर्सेनिक की मात्रा काफ़ी अधिक पाई गई है वहां की महिलाओं को इसके लिए अपने दूध की जांच कराना बहुत ज़रूरी है ताकि उनके बच्चे स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें।”
  • inter faith
    काशिफ काकवी
    अंतर-धार्मिक विवाह: एक उच्च न्यायालय, दो एक जैसे मामले, लेकिन फ़ैसले अलग-अलग!
    27 Feb 2022
    एक मामले में जहाँ मध्य प्रदेश की अदालत पूरी तरह से एक अंतर-धार्मिक जोड़े के बचाव में आ गई, लेकिन इसी प्रकार के दूसरे मामले में, पूरा केस लड़की की भलाई पर एक पखवाड़े की रिपोर्ट के वास्ते लंबित है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में कौन आगे, कौन पीछे और यूक्रेन पर रूसी हमले का सच
    26 Feb 2022
    यूपी में मतदान के पांचवे चरण से ऐन पहले बडा सवाल है: चुनावी जंग में कौन आगे है और कौन पीछे? क्या होगा नतीजा? #HafteKiBaat के नये एपिसोड में यूक्रेन पर रूसी हमले का सच बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार…
  • delhi violence
    मुकुंद झा
    दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़
    26 Feb 2022
    जिनके घर के कमाने वाले इस दंगे में मारे गए वो आज भी अपने लिए इंसाफ ढूंढ रहे हैं। इसी के लिए आज यानी 26 फरवरी 2022 को दंगा पीड़ितों, नागरिक समाज के लोगों, सीपीआई(एम) की दिल्ली कमेटी के आह्वान पर बहुत…
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: कीव में सड़कों पर घमासान,लोगों से शरण लेने की अपील
    26 Feb 2022
    रूसी सैनिकों ने शनिवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव में प्रवेश किया और सड़कों पर घमासान शुरू हो गया है, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से छुप जाने की अपील की है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License