NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: समझदार सरकार और नासमझ जनता!
मुझे तो मोदी जी पर तरस आता है। पहले तो जनता के भले के लिए काम करो फिर जनता को समझाओ कि इस काम में तुम्हारा भला क्यों है, कैसे है और कितना है। इतने समझदार प्रधानमंत्री को ऐसी नासमझ जनता मिली है, लानत है इस पर।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
13 Dec 2020
kisan andolan

भारतीय जनता दिनों दिन बेवकूफ़, सभ्य भाषा में कहें तो नासमझ होती जा रही है और वर्तमान सरकार और उसके मंत्रियों का यह दुर्भाग्य है कि उन्हें इस नासमझ जनता को समझाना पड़ रहा है। और यह विचार मेरा नहीं, मोदी जी और उनके सारे समर्थकों का है।

ऐसा नहीं है कि भारत की जनता शुरू से ही ऐसी थी। पहले तो वह बहुत ही समझदार, होशियार होती थी।

देश की जनता 2014 तक बहुत ही समझदार होती थी। सरकार तो उसे समझदार मानती थी ही, विपक्ष भी उसे समझदार ही समझता था। जनता की समझ तो 2011-12 तक इतनी विकसित हो गई थी कि उसे 3जी, 4जी, कोल घोटालों जैसी उलझन भरी गूढ़ बातें भी समझ में आ गईं थीं। पर जैसे ही सरकार बदली जनता की समझ को न जाने क्यों जंग लग गया।

tirchi nazar

सरकार ने पहले तो नोटबंदी की। जनता को समझाया कि इसके अनेकों लाभ हैं। लेकिन नासमझ जनता को यह समझ नहीं आया कि यह नोटबंदी तो एक तीर से अनेक शिकार करने वाली बात है। इससे काला धन तो समाप्त होगा ही साथ ही रिश्वतखोरी भी समाप्त हो जायेगी। आतंकवाद, नक्सलवाद सब समस्याओं का समाधान हो जायेगा। और नकली नोट, वे तो दूर दूर तक दिखाई तक नहीं देंगे। लेकिन जनता की समझ में आया ही नहीं। वह आज भी मोदी जी के मुंह से "भाईयों और बहनों" सुनते ही सहम जाती है। 

फिर आया जीएसटी, मतलब दूसरी आजादी। यह जीएसटी व्यापारियों पर लागू हुआ और उनके सीए को हिसाब बनाना है। लागू हुए तीन साल से अधिक हो चुके हैं पर अभी भी जीएसटी को लेकर व्यापारी और उनके अकाउंटेंट सभी परेशान हैं। आज तक भी उन्हें कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। राज्य सरकारें भी अलग से परेशान हैं कि केंद्र जब मर्जी चाहे उन्हें ब्लैक मेल करने लगता है। उनका जीएसटी शेयर रोक लेता है। 

फिर आया धारा 370 समाप्त करने वाला बिल। वह कश्मीरियों को समझ नहीं आया। एनआरसी असम वासियों की समझ से बाहर रहा। सीएए, क्या हिंदू, क्या मुसलमान, क्या सिख और क्या ईसाई, किसी की भी समझ में नहीं आया। सरकार ने बार बार समझाया पर न जाने कैसी जनता मिली है इस सरकार को कि उसे कितना भी समझाओ, उसके पल्ले कुछ भी नहीं पड़ता है। 

सरकार ने फिर जनता कर्फ्यू लगाया। थाली परात बजावाये। लॉकडाउन लगाया। और भी बहुत कुछ करवाया। सब कुछ कोरोना को रोकने के लिए करवाया। लेकिन न जनता की समझ में आया और न वायरस की समझ में आया। जनता बीमार पड़ती रही, घटती रही और वायरस बढ़ता रहा। जनता को समझाना पड़ा, हमारे यहाँ बीमारी अमरीका से कम है। बीमारी में हम भले ही अमरीका से पीछे रह गये हैं लेकिन जीडीपी के घटने के मामले में हम सबसे आगे निकल गये हैं।

अब सरकार कृषि कानूनों को लेकर आई है। ये जो तीन तीन कानून सरकार अम्बानी अडानी.... सॉरी, जुबान फिसल गई जरा। तो ये जो तीन कानून सरकार किसानों के भले के लिए लाई है, किसानों के समझ में ही नहीं आ रहे हैं। मतलब ये किसान भी, क्या कहा जाए इन किसानों के बारे में। ये किसान भी कितने नासमझ निकले। इन किसानों को समझाने के लिए सरकार को अखबारों में पूरे पूरे पृष्ठ के विज्ञापन देने पड़ रहे हैं। पुस्तिकाएं छपवानी पड़ रही हैं। देश के सात सौ जिलों में मीटिंग करनी पड़ रही हैं। सब किसलिए, इन नासमझ किसानों को समझाने के लिए।

मुझे तो मोदी जी पर तरस आता है। जो कुछ करते हैं, जनता के लिए ही करते हैं। आज तक अपने लिए, अपने मित्रों के लिए, अपनी पार्टी के लिए कुछ नहीं किया। निक्का सा भी नहीं किया। पहले तो जनता के भले के लिए काम करो फिर जनता को समझाओ कि इस काम में तुम्हारा भला क्यों है, कैसे है और कितना है। इतने समझदार प्रधानमंत्री को ऐसी नासमझ जनता मिली है, लानत है इस पर। इतनी नासमझ जनता के प्रधानमंत्री बनने की शर्म की वजह से मोदी जी के गाल दिनों दिन सुर्ख लाल होते जा रहे हैं और दाढ़ी बहुत ही तरतीब से बढ़ती जा रही है। मोदी जी समझदार हैं, अगर उन्हें पहले से ही पता होता कि इतनी नासमझ प्रजा मिलेगी तो वे प्रधानमंत्री बनने से ही मना कर देते। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

 

tirchi nazar
Political satire
dron sharma
Narendra modi
modi sarkar
kisan andolan

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!


बाकी खबरें

  • Gauri Lankesh pansare
    डॉ मेघा पानसरे
    वे दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी या गौरी लंकेश को ख़ामोश नहीं कर सकते
    17 Feb 2022
    दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और गौरी को चाहे गोलियों से मार दिया गया हो, मगर उनके शब्द और उनके विचारों को कभी ख़ामोश नहीं किया जा सकता।
  • union budget
    टिकेंदर सिंह पंवार
    5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल
    17 Feb 2022
    केंद्र सरकार लोगों को राहत देने की बजाय शहरीकरण के पिछले मॉडल को ही जारी रखना चाहती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 541 मरीज़ों की मौत
    17 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 30,757 नए मामले सामने आए है | देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 27 लाख 54 हज़ार 315 हो गयी है।
  • yogi
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा करने वाली BJP का, 5 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ और ही कहता है
    17 Feb 2022
    "पूरे देश में सबसे ज्यादा महंगी बिजली उत्तर प्रदेश की है। पिछले महीने मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने 50 प्रतिशत बिजली बिल कम करने का वादा किया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया। ये बीजेपी के चुनावी वादे…
  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव : पुलवामा के बाद भारत-पाक व्यापार के ठप हो जाने के संकट से जूझ रहे सीमावर्ती शहर  
    17 Feb 2022
    स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ व्यापार के ठप पड़ जाने से अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन जैसे उन शहरों में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी पैदा हो गयी है, जहां पहले हज़ारों कामगार,बतौर ट्रक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License