NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पुस्तकें
सतत सुधार के लिए एक खाका पेश करती अंशुमान तिवारी और अनिंद्य सेनगुप्ता की किताब "उल्टी गिंनती"
अंशुमान तिवारी और अनिंद्य सेनगुप्ता का आकलन है कि भारत को 2020-21की नेगेटिव ग्रोथ के बाद मंदी से उभरने के लिए अगले एक दशक तक सालाना करीब 9 फ़ीसदी विकास दर की जरूरत है, जिसके लिए प्रत्येक वर्ष 37 फ़ीसदी की दर से निवेश और 1.2 करोड़ रोजगार चाहिए।
सतीश भारतीय
09 Dec 2021
ULTI GINTI

आर्थिक खबरों के विश्लेषण के लिए हिंदी की दुनिया के जाने-माने  पत्रकार अंशुमान तिवारी और सार्वजनिक नीति विश्लेषक अनिंद्य सेनगुप्ता द्वारा लिखित किताब "उल्टी गिनती"  का दूसरा संस्करण अक्टूबर 2021 में प्रकाशित हुआ है। यह किताब अर्थ जगत में दिलचस्पी रखने वालें लोगों के लिए बहुत खास है। किताब 'मंदी और महामारी की दोहरी मार' से कैसे उभरेगा भारत? इस पर विभिन्न आयामों की परख करती है। और भारत के भविष्य के लिए आर्थिक सुधारों का एक मुखौटा पेश करने का प्रयास करती है। पुस्तक भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थायी और पुरानी दरारों को समझने और खोजने की कोशिश है, जो कोविड-19 की दो‌ लहरों के बाद कहीं ज्यादा चौड़ी और घातक हो गई हैं। तो चलिए हम रुख़ करते हैं कि अंशुमान तिवारी और अनिंद्य सेनगुप्ता इस किताब के जरिए  कोरोनाकाल और भारत के भविष्य की आर्थिक स्थिति को किस तरह देखते है।

वह किताब में जिक्र करते है कि भारत की मंदी 2020-21 को पूरी तरह एक मजबूर लॉकडाउन और ध्वस्त स्वास्थ्य व्यवस्था से निकला भले मान लिया गया हो, लेकिन हकीकत में भारतीय अर्थव्यवस्था की ढलान 2012 से प्रारंभ हो चुकी थी। 2018 आने तक भारत में श्रम बाजार में 1.2 करोड़ लोग हर साल रोजगार मांगते नजर आने लगे।

वहीं 2020 में कोविड-19 के असर से करीब 11 करोड़ लोग बेरोजगार हुए। जून 2021 में आए सर्वेक्षणों से पता चला कि ओला-उबर जो उस वक्त सबसे ज्यादा रोजगार लाए थे। उनकी करीब 35000 कैब कर्ज बकाए के कारण बैंकों और वित्तीय कंपनियों ने जब्त कर ली।

पुस्तक में आगे बताया गया कि अप्रैल 2021 में डन एंड ब्रैडस्ट्रीट ने एक सर्वे में पाया था कि करीब 82 फ़ीसदी छोटे उद्योगों का कामकाज चौपट हो गया और भारत में करीब 80 फ़ीसदी छोटी इकाइयां पूंजी की भयानक कमीं का शिकार हैं। मार्च 2020 से मार्च 2021 के बीच भारत में कुल रोजगारों में 54 लाख की कमीं आयी।‌ नवंबर 2020 तक बेरोजगारी की 49 फीसदी मार महिलाओं पर पड़ चुकी थी और कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल 2021 में महिलाओं में बेरोजगारी पुरुषों के मुकाबले 3 गुना बढ़ गई थी।

मैकिंजी के मुताबिक भारत को 2022 से 2030 के दौरान कम से कम 10 करोड़ नई नौकरियों की जरूरत होगी। वहीं पुरुषों के मुकाबले यदि महिलाओं की बेरोजगारी को देखा जाए तो महिलाओं के लिए 2030 तक 15 करोड़ नई नौकरियों की जरूरत होगी।

किताब से आगे ज्ञात होता है कि भारत में ब्रिटिश युग अकाल और 1919 की महामारी के बाद कोरोना से तीसरी सबसे बड़ी तबाही हुयी, जिसमें मार्च 2020 से जून 2021 तक भारत में करीब 3. 80 लाख लोग मारे गए। 12 करोड़ लोगों के रोजगार छिने। तो वहीं 23 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे खिसक गए और 2020 के पलायन और लॉकडाउन ने 88 फीसदी परिवारों की आय तोड़ दी।

जून 2020 के एक सर्वे में पाया गया कि ज्यादातर कारोबारियों की आय में अप्रैल से जून 2020 के दौरान 80-90 फ़ीसदी से अधिक की कमी हुई।

भारत में 60 फ़ीसदी जीडीपी आम लोगों के खर्च पर आधारित है और लोगों का रोजगार छूटने की वजह से 2020-21 में अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.5% रह गई। और लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को करीब 10 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ।

देश की 600 बड़ी कंपनियां कुल  राजस्व 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा जीडीपी (महंगाई सहित)में 48 फीसदी, निर्यात में 40 फ़ीसदी और औपचारिक रोजगार में 20 फ़ीसदी हिस्सा रखती हैं और इनकी उत्पादकता दर पूरी अर्थव्यवस्था की तुलना में 11 गुना अधिक है।

भारत को एक दशक तक 9 करोड़ रोजगार का लक्ष्य पूरा करने के लिए 2030 तक ऐसी 1000 कंपनियों की जरूरत होगी। जिन्हें 2030 तक 2.4 ट्रिलियन डॉलर की नई पूंजी जुटानी होगी। और 9 करोड़ रोजगार के लक्ष्य के लिए अगले 10 साल तक जीडीपी के अनुपात में 37 फ़ीसदी की दर से सालाना निवेश चाहिए। जिससे 2023 से 2030 के बीच औसतन 8 से 9 फीसदी की सालाना विकास दर पर हर साल 1.2 करोड़ रोजगार तैयार हो सकें।

किताब में आगे जिक्र किया गया है कि भारत में लगभग 40 करोड़ लोग गरीब हैं, जिनके पास आपदाओं को झेलने लिए कोई ऐसी सुरक्षा नहीं जिससे वह मरने से बच पाए। जनगणना 2011 के मुताबिक करीब 50 करोड़ लोग या 55 फ़ीसदी ग्रामीणों के पास जमीन का एक टुकड़ा तक नहीं है। इंडिया रेटिंग्स के अध्ययन ने बताया कि खेती के कामों से गांव में मजदूरी दर 8.5 फीसदी (अप्रैल-अगस्त 2020) से घटकर 2.9 फीसदी (मार्च-नवंबर 2021) पर आ गई।

1950 के दशक के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब प्रति व्यक्ति वार्षिक खर्च केवल 7 प्रतिशत (2013 और 2020 के बीच) की गति से बढ़ा जबकि कमाई में बढ़ोतरी 5.5 प्रतिशत रह गई।

आईएमएफ का एक अध्ययन बताता है कि युवा आबादी की वजह से प्रति व्यक्ति आय में अतिरिक्त बढ़ोतरी का सबसे अच्छा दशक 2011 से 2020 खत्म हो गया। इस दशक में देश की प्रति व्यक्ति आय 2.62 प्रतिशतांक बढ़ी, जो पिछले 20 सालों में सबसे ज्यादा थी। लेकिन 2020 से 30 के दशक में इसमें तेज गिरावट नजर आएगी।

अप्रैल-मई-जून 2021 में महंगाई ने नए तेवर दिखाए और सीएमआईई के अनुसार भारत में 96 फीसदी लोगों की आय में कमी आई। तो वहीं 2021 में पेट्रोल-डीजल की महंगाई में (मई और जून के बीच ) 22 बार मूल्य वृद्धि हुई।

किताब में स्वास्थ खर्च के बारे बताते हुए जिक्र किया गया कि कोविड-19 के इलाज पर लोगों ने 66000 करोड़ रुपए ज्यादा खर्च किए। वहीं विश्व बैंक का आंकड़ा  कहता है कि भारत में स्वास्थ्य पर कुल खर्च में सरकार का हिस्सा केवल 27 फ़ीसदी है जबकि लोग अपनी जेब से करीब 73 फीसदी लागत उठाते हैं।

किताब के मुताबिक 2021 से 2031 के बीच भारत की कामगार आबादी हर साल 97 लाख लोगों की दर से बढ़ेगी जबकि अगले एक दशक में यह हर साल 42 लाख सालाना की दर से कम होने लगेगी। तो वहीं 2041 तक भारत की युवा आबादी का अनुपात अपने चरम पर पहुंच चुका होगा। क्योंकि कार्यशील आयु के 20 से 59 वर्ष वाले लोग आबादी के करीब 60 फ़ीसदी होंगे।

वहीं मैकिंजी की एक रिपोर्ट बताती है कि सरकारों को बैलेंस शीट संभालना सबसे ज्यादा मुश्किल होने वाला है। 2030 तक सरकारों के घाटे 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंच जाएंगे। इसके लिए उन्हें संपत्तियां बेचनी होगी या टैक्स बढ़ाने होंगे।
2021 में दुनिया का सावरिन या पब्लिक डेट कर्ज, सकल विश्व‌ उत्पाद का 96‌ फीसदी हो जायेगा। भारत में ही कर्ज जीडीपी अनुपात 2021 में 80 फ़ीसदी होने वाला है। और 2023 से ब्याज दर बढ़ेगी यानी भारतीय बाजार में सस्ती पूंजी के दिन पूरे हो रहे हैं कच्चे तेल की कीमतों ने जून 2021 की कीमतों में 10 साल का औसत तोड़कर 75 डॉलर की तरफ कदम बढ़ा दिया है।

यह किताब कोरोना और   लॉकडाउन के मध्य जरूरतों से जूझते संघर्षशील गोविंद, खंडूजा और रोहन जैसे आदि लोगों के जीवन की सच्चाई भी बयां करती है जिनमें कोरोना से किसी ने अपना रोजगार खोया, नौकरी खोयी तो किसी ने परिवार खो दिया, तो कोई सांसों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर तलाशता रह गया। और कोविड-19 की तबाही से इंसान न अपनों को बचा पाया और न सपनों को बचा पाया। 

ULTI GINTI
Book

Related Stories

किताब: यह कविता को बचाने का वक़्त है

लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजाकर करती एम.जी देवसहायम की किताब ‘‘चुनावी लोकतंत्र‘‘

‘शाहीन बाग़; लोकतंत्र की नई करवट’: एक नई इबारत लिखती किताब

पृथ्वी पर इंसानों की सिर्फ एक ही आवश्यक भूमिका है- वह है एक नम्र दृष्टिकोण की

रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार 2021, 2022 के लिए एक साथ दिया जाएगा : आयोजक

तरक़्क़ीपसंद तहरीक की रहगुज़र :  भारत में प्रगतिशील सांस्कृतिक आंदोलन का दस्तावेज़

समीक्षा: तीन किताबों पर संक्षेप में

मास्टरस्ट्रोक: 56 खाली पन्नों की 1200 शब्दों में समीक्षा 

जन मुक्तियुद्ध की वियतनामी कथा- ‘हंसने की चाह में’

विशेष : सोशल मीडिया के ज़माने में भी कम नहीं हुआ पुस्तकों से प्रेम


बाकी खबरें

  • poverty
    अजय कुमार
    ग़रीबी के आंकड़ों में उत्तर भारतीय राज्यों का हाल बेहाल, केरल बना मॉडल प्रदेश
    28 Nov 2021
    मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक केरल के अलावा भारत का और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां की बहुआयामी गरीबी 1% से कम हो। 
  • kisan andolan
    शंभूनाथ शुक्ल
    हड़ताल-आंदोलन की धार कुंद नहीं पड़ी
    28 Nov 2021
    एक ज़माने में मज़दूर-किसान यदि धरने पर बैठ जाते थे तो सत्ता झुकती थी। पर पिछले चार दशकों से लोग यह सब भूल चुके थे।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    संवैधानिक मानववाद या कारपोरेट-हिन्दुत्ववाद और यूपी में 'अपराध-राज'!
    27 Nov 2021
    संविधान दिवस के मौके पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपो की खूब बौछार हुई. क्या सच है-संविधानवाद और परिवारवाद का? क्या भारत की सरकारें सचमुच संविधान के विचार और संदेश के हिसाब से…
  • crypto
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Crypto पर अंकुश ज़रूरी है?
    27 Nov 2021
    मोदी सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर अंकुश लगा रही हैI लेकिन आखिर यह क्रिप्टोकरेंसी है क्या? क्या यह देश में मुद्रा की जगह ले सकती है?
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान मोदी को लोकतंत्र का सबक़ सिखाएगा और कॉरपोरेट की लूट रोकेगा: उगराहां
    27 Nov 2021
    ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने टिकरी बॉर्डर स्थित गुलाब बीबी नगर में बात की जुझारू किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (एकता) उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां से और उनसे जानने की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License