NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोयले की कमी? भारत के पास मौजूद हैं 300 अरब टन के अनुमानित भंडार
भारत को कोयला खदानों के लिए गहन योजना बनाने और प्रभावी प्रबंधन की ज़रूरत है।
श्रीधर राममूर्ति
19 May 2022
Coal

पिछले कुछ हफ्तों में कोयले की कमी और विद्युत संकट पर अखबारों में कई रिपोर्ट प्रकाशित हुई हैं। क्या वाकई में यह संकट है या फिर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जिसमें इस बेकार ईंधन के इस्तेमाल को जारी रखा जा सके और कुछ निहित हितों को फायदा पहुंचाया जा सके। 

ऊर्जा मंत्रालय ने कमी से इंकार करते हुए कहा है कि कोयले की कोई कमी नहीं है। लेकिन इस वक्तव्य के उलट, सरकार ने अनुमति प्राप्त क्षमता के परे 10 फ़ीसदी उत्पादन की अनुमति दे दी है, इसे "विशेष खपत" का नाम दिया गया है, जबकि इस अतिरिक्त अनुमति देने की प्रक्रिया में ना तो कोई प्रभाव विश्लेषण किया गया और ना ही स्थानीय लोगों से सलाह संबंधी किसी नियम का पालन किया गया। सरकार ने राज्य सरकारों से भी कोयला आयात को तेज करने के लिए कहा है। कोयले को प्राथमिकता देने के लिए कुछ यात्री ट्रेनों को रोका गया या बाधित किया गया। 

चलिए हम "नॉन कोकिंग" कोयले का मामला लेते हैं, जिसे तापीय कोयला भी कहा जाता है, क्योंकि यह ऊर्जा उत्पादन में सहायक होता है। भारत में फिलहाल 150 अरब टन कोयले के भंडार होने की बात को साबित किया जा चुका है। जबकि 300 अरब टन कोयला भंडार होने का अनुमान है। इसलिए संसाधनों की तो कोई कमी नहीं है।

फिलहाल ताप ऊर्जा कोयले की मांग सालाना तौर पर 700 मिलियन टन से भी कम है। हमने ऐसी खदानों को खोला और लाइसेंस दिया है, जिनकी क्षमता करीब़ डेढ़ अरब टन कोयला उत्पादित करने की है। इसलिए भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण और वन अनुमति मिलने में देरी होने और कम क्षमता का शोर मचाकर विस्तार या आयात को अनुमति देने अतार्किक है और तथ्यों पर आधारित नहीं है। 

पर्यावरण और जैव विविधता नुकसान की पृष्ठभूमि में कोयला खनन की तार्किकतासे जुड़ा एक और बेहद अहम आयाम है। कोल इंडिया 200 से ज़्यादा खदानों में नुकसान सह रही है, जिसकी कीमत करीब़ 12,500 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पारदर्शी नहीं है, क्योंकि छोटी खदानों के स्तर पर लाभ-नुकसान के आंकड़े सार्वजनिक नहीं हैं। यह आंकड़े कंपनी द्वारा सालाना प्रदर्शित किए जाने वाले भारी-भरकम मुनाफ़े में दब जाते हैं। हम नुकसान करवाने वाली खदानों को बंद कर सकते हैं और उनके संसाधनों का उपयोग कामग़ारों के पुनर्वास में कर सकते हैं, साथ ही पर्यावरण के ह्रास के प्रभावों को भी इससे कम किया जा सकता है, जिससे स्थानीय समुदायों की आजीविका फिर से बहाल हो सकेगी। 

देश में 400 से ज़्यादा कोयले की खदाने हैं। लेकिन शुरुआती 26 खदानों के पास ही इतनी क्षमता है कि हमारी जरूरत का सारा कोयला उनसे निकाला जा सकता है। और 25 खदानें हमारी 2030 तक की जरूरतों को पूरा कर सकती हैं। खदानों की संख्या कम करने से खदानों के दुष्प्रभाव भी कम होंगे और इन्हें बेहतर ढंग से प्रबंधित भी किया जा सकेगा। 

हमें यह प्रवृत्ति छोड़नी चाहिए कि देश में मौजूद हर खनिज भंडार का खनन कर लिया जाए, क्योंकि यह नवीकरणीय संसाधन हैं। अब ऊर्जा क्षमता की तरफ देखते हैं। हमारे पास ऊर्जा उत्पादन के लिए 4.01 मिलियन मेगावॉट से ज़्यादा क्षमता है। 16 मई की दोपहर को सबसे ज़्यादा विद्युत मांग के वक़्त, 1.97 मिलियन मेगावॉट की मांग को पूरा करने के बाद 6,494 मेगावॉट अधिशेष विद्युत उपलब्ध थी।

अगर हम विकास के नाम पर कोयला खनन के लिए आदिवासियों के ऊपर किए गए अत्याचारों को देखें, अगर हम कोयला और ताप विद्युत उत्पादन क्षेत्रों में होने वाले भयावह स्तर के प्रदूषण और कोयले की वास्तविकता को देखें, तो यह जरूरी हो जाता है कि हम अपने कोयला और ताप विद्युत उद्योग को तुरंत पूरी तरह बदल लें। इसके लिए खदानों की संख्या को ठीक करने और उनके लिए बेहतर उत्पादन प्रबंधन के तरीकों की जरूरत है। साथ ही खदानों की कीमत भी बताए जाने की जरूरत है, ताकि हम क्या मूल्य चुका रहे हैं, उसे ठीक ढंग से प्रदर्शित किया जा सके।

हमें ज़्यादा कठोर अवसंरचना की जरूरत नहीं है, बल्कि हमें बेहतर योजना और प्रभावी प्रबंधन की जरूरत है। दुर्भाग्य से हमारे दिमागों में कोयले की कमी की बात डाली जा रही है, जबकि इस दौरान असली वज़हों और समाधानों का विश्लेषण नहीं किया जा रहा है। जबतक हम मानसून और गर्मी में कोयले की कमी की इस नौटंकी को पहचानकर ठीक नहीं करते हैं, तब तक हमें बेवजह के कोयला खनन विस्तार और महंगा कोयला आयात प्रभावित करता रहेगा।

लेखक एनवॉयरॉनिक्स ट्रस्ट, नई दिल्ली के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। 

Coal Shortage? India has Estimated Total Reserves of 300 Billion Tonnes

Coal Shortage
coal mines
power cuts
electricity
cola india
Power plants

Related Stories

केंद्र का विदेशी कोयला खरीद अभियान यानी जनता पर पड़ेगा महंगी बिजली का भार

कोयले की किल्लत और बिजली कटौती : संकट की असल वजह क्या है?

बिजली संकट को लेकर आंदोलनों का दौर शुरू

बिजली संकट: पूरे देश में कोयला की कमी, छोटे दुकानदारों और कारीगरों के काम पर असर

सरकार का दो तरफ़ा खेल... ‘’कोयले की कमी भी नहीं विदेशों से आयात भी करना है’’

डीजेबी: यूनियनों ने मीटर रीडर्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई वापस लेने की मांग की, बिलिंग में गडबड़ियों के लिए आईटी कंपनी को दोषी ठहराया

बिहारः "सबसे पहले सरकारी आवासों में प्रीपेड मीटर लगाने का काम शुरू हो'

ग्राउंड रिपोर्ट: देश की सबसे बड़ी कोयला मंडी में छोटी होती जा रही मज़दूरों की ज़िंदगी

भू-विस्थापितों के आंदोलन से कुसमुंडा खदान बंद : लिखित आश्वासन, पर आंदोलन जारी

नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली ख़रीद पर निर्भर तमिलनाडु ने कोयले की कमी का किया मुक़ाबला 


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के क़रीब साढ़े तीन लाख नए मामले सामने आए
    21 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के साढ़े तीन लाख के क़रीब यानी 3,47,254 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5.23 फ़ीसदी यानी 20 लाख 18 हज़ार 825 हो गयी है।
  • jute mill
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    बंगाल : जूट मिल बंद होने से क़रीब एक लाख मज़दूर होंगे प्रभावित
    21 Jan 2022
    नौ प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की है।
  • online education
    सतीश भारतीय
    ऑनलाइन शिक्षा में विभिन्न समस्याओं से जूझते विद्यार्थियों का बयान
    21 Jan 2022
    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि इस वक्त ऑनलाइन शिक्षा एक औपचारिकता के रूप में विद्यमान है। सरकार ने धरातलीय हकीकत जाने बगैर ऑनलाइन शिक्षा कोरोना…
  • Ukraine
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यमन का ड्रोन हमला हो या यूक्रेन पर तनाव, कब्ज़ा और लालच है असल मकसद
    20 Jan 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबु धाबी पर किये ड्रोन हमले की असल कहानी पर प्रकाश डाला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक…
  • rich poor
    अजय कुमार
    दुनिया के 100 से अधिक करोड़पतियों-अरबपतियों ने लिखी खुली चिट्ठी, कहा- अपने हिस्से का टैक्स नहीं चुका रहे अमीर! 
    20 Jan 2022
    100 से अधिक करोड़पतियों और अरबपतियों की देश के नेताओं और कारोबारियों के नाम खुली चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि बेकार टैक्स प्रणाली की वजह से भयंकर आर्थिक गैर बराबरी पनप रही है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License