NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
भारत
राजनीति
हरिद्वार-देहरादून के बीच 100 की रफ़्तार से दौड़ी ट्रेन, वन्यजीवों की बढ़ी चुनौती
राजाजी टाइगर रिज़र्व की सीमाएं हमारे लिए परिभाषित हैं लेकिन वन्यजीव इन सीमाओं में नहीं रहते। पूरा जंगल उनका घर है। पानी की तलाश में वे रेलवे ट्रैक को पार करते हैं। हरिद्वार-देहरादून, ऋषिकेश-रायवाला के बीच हाथियों की आवाजाही होती रहती है।
वर्षा सिंह
17 Feb 2021
Elephants
हरिद्वार में रेल की पटरियों को पार करता हाथियों का काफ़िला। फाइल फोटो।

राजाजी टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के वन्यजीवों के सामने अब एक नई चुनौती होगी। उन्हें सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ती हाईस्पीड ट्रेन का सामना करना पड़ सकता है। हाथी भले ही धरती पर मौजूद सबसे विशालकाय जीव हों। लेकिन हवा से बातें करती ट्रेन के सामने उनका वजूद बहुत भारी नहीं होता।

14 फरवरी को रेलवे ने हरिद्वार से देहरादून और रायवाला से ऋषिकेश के बीच 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से ट्रेन का ट्रायल किया। दिन में हुए इस ट्रायल के दौरान राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेन की रफ़्तार 55 किलोमीटर रखी गई। रेल पथ निरीक्षक विक्रम सिंह ने मीडिया को बताया कि ये ट्रायल सफल रहा। अब इसकी रिपोर्ट मुरादाबाद रेल मंडल को भेजी गई है। वहां से मंजूरी मिलते ही हरिद्वार-देहरादून के बीच हाईस्पीड ट्रेनें दौड़ने लगेंगी।

इससे पहले 8 जनवरी को भी रेलवे ने हरिद्वार में सौ की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाई थी। जिसने जिले के जमालपुर कलां गांव के पास ट्रेन की पटरी के पास बैठे चार युवकों को रौंद दिया। उस समय भी ट्रेन की स्पीड पर सवाल उठे। राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने भी वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर इस पर आपत्ति जतायी।

टाइगर रिज़र्व में 35 से अधिक नहीं हो सकती ट्रेन की रफ़्तार 

हरिद्वार-देहरादून, ऋषिकेश-रायवाला के जिन रेलवे ट्रैक की बात की जा रही है। उसका तकरीबन 24 किलोमीटर हिस्सा राजाजी टाइगर रिज़र्व के कोर वन क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र में वन्यजीवों की रेलवे ट्रैक पर लगातार आवाजाही होती रहती है। वर्ष 2015 में जब हरिद्वार-देहरादून के बीच रेलवे के विद्युतीकरण का प्रस्ताव दिया गया था। उस समय राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड की बैठक में तय किया गया था कि राजाजी टाइगर रिजर्व में ट्रेनों की रफ्तार रात के समय 35 किलोमीटर प्रतिघंटा और दिन के समय अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। फरवरी, 2016 में नैनीताल हाईकोर्ट ने भी अपने एक आदेश में राष्ट्रीय पार्कों में ट्रेनों की रफ़्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा रखने की बात कही थी।

(रेलवे द्वारा जारी ट्रायल की सूचना)

तेज़ रफ़्तार ट्रेन हाथियों के लिए हो सकती हैं घातक

राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक डीके सिंह बताते हैं 13 फरवरी को रेलवे ने इस ट्रायल की सूचना दी थी। उस पर हमने कहा था कि पार्क क्षेत्र में आप 35 किमी से अधिक रफ्तार से ट्रेन नहीं चला सकते हैं। यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसका ज़िम्मेदार रेलवे होगा। वह बताते हैं कि 14 फरवरी को ट्रायल के दौरान जंगल के भीतर 100 की रफ्तार से ट्रेन नहीं चलाई गई। 35 किमी की रफ्तार रखी गई। डीके सिंह कहते हैं कि जंगल में अगर तेज़ रफ़्तार ट्रेन चली तो दुर्घटनाएं नहीं टाली जा सकेंगी। हाथी जैसे जीवों पर खतरा होगा और हिरन जैसे जीव तो मारे ही जाएंगे। इसलिए हमने अपने कर्मचारियों को निर्देश दिये हैं कि टाइगर रिजर्व के अंदर अगर हाईस्पीड ट्रेन चली तो रेलवे के ऊपर केस करेंगे। क्योंकि ये अनजाने में नहीं हुआ, बल्कि जानबूझ कर किया गया है। 

राजाजी टाइगर रिजर्व की सीमाएं हमारे लिए परिभाषित हैं लेकिन वन्यजीव इन सीमाओं में नहीं रहते। पूरा जंगल उनका घर है। पानी की तलाश में वे रेलवे ट्रैक को पार करते हैं। हरिद्वार-देहरादून, ऋषिकेश-रायवाला के बीच हाथियों की आवाजाही होती रहती है। राजाजी टाइगर रिजर्व के करीब 820 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में करीब 350 हाथियों की मौजूदगी है।

हरिद्वार और देहरादून के बीच मोतीचूर, कांसरो और रायवाला रेलवे स्टेशन हाथियों की दुर्घटना के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। ये पूरा क्षेत्र टाइगर रिजर्व के कोर ज़ोन में आता है।

 

(वर्ष 2019 में हरिद्वार में ट्रेन से कटकर हुई थी दो हाथियों की मौत)

50 की रफ़्तार भी वन्यजीवों के लिए है जानलेवा

हरिद्वार में वाइल्ड लाइफ़ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के साथ बतौर सलाहकार कार्य कर रहे दिनेश चंद्र पांडे बताते हैं कि देहरादून से हरिद्वार के बीच ढलान पर 100 किमी की रफ़्तार से ट्रेन चलेगी तो रफ़्तार पर नियंत्रण रखना बेहद मुश्किल होगा। 50 की रफ्तार में ही ट्रेन चलाने पर लोको पायलट को बहुत ब्रेक लगाने पड़ते हैं नहीं तो ट्रेन बेकाबू होने का अंदेशा होता है। 100 की रफ़्तार में ट्रेन ऊंचाई से निचले इलाके में आएगी तो किसी भी सूरत में उसकी रफ़्तार काबू में नहीं आएगी। देहरादून से हरिद्वार तक जनशताब्दी में लोको पायलट के साथ यात्रा के अनुभव के बारे में उन्होंने हमें बताया।

डब्ल्यूटीआई हरिद्वार में उत्तराखंड वनविभाग के साथ एलि-ट्रैक प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व में रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौत के बढ़ते मामलों के बाद वर्ष 2002 में ये प्रोजेक्ट शुरू हुआ। इसका मकसद रेलवे ट्रैक पर होने वाली दुर्घटनाओं में हाथियों की मौत को रोकना है। संस्था के कर्मचारी वन विभाग के फील्ड स्टाफ के साथ शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक रेलवे ट्रैक के आसपास पेट्रोलिंग करते हैं। ये समय हाथियों की आवाजाही के लिहाज से संवेदनशील होता है। इस दौरान हाथी अगर रेलवे ट्रैक के नज़दीक आते-जाते हैं तो उन्हें ट्रैक से हटाने की कोशिश की जाती है। साथ ही हरिद्वार रेलवे स्टेशन अधीक्षक को इसकी सूचना देनी होती है।

दिनेश चंद्र पांडे कहते हैं कि हाईस्पीड ट्रेन होने से ट्रैक पर हाथियों की दुर्घटना में मारे जाने की आशंका कई गुना बढ़ जाएगी। इसके अलावा सांभर-चीतल, मोर, जंगली सूअर जैसे वन्यजीव आए दिन ट्रेन की चपेट में आकर मारे जाते हैं। अधिक रफ्तार इन छोटे प्राणियों का संकट अधिक कर देगी।

रात्रि गश्त में एक वर्ष में हरिद्वार में 385 बार टली हाथियों की दुर्घटना

आर्थिक विकास के लिए तेज़ी से सड़क और रेलवे का विस्तार हो रहा है, ये दोनों ही बुनियादी ढांचे दुनियाभर में वन्यजीवों की मौत की बड़ी वजह में से एक हैं। डबल्यू-डब्ल्यू-एफ और डबल्यूटीआई की एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1987 से 2017 तक 265 से अधिक हाथियों की मौत ट्रेन की टक्कर से हुई है। वर्ष 2016-17 में ही देशभर में 21 हाथी ट्रेन दुर्घटना में मारे गए। इनमें उत्तराखंड भी शामिल है।

वर्ष 2019 में लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने जानकारी दी थी कि वर्ष 2015-16 से 31 दिसंबर 2018 के बीच देशभर में 62 हाथियों की मौत ट्रेन से टकराने की वजह से हुई थी। 2019 में हरिद्वार के ज्वालापुर-सीतापुर क्षेत्र में तेज़ रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से दो हाथियों की मौत हुई थी। ये क्षेत्र तो राजाजी टाइगर रिजर्व में भी नहीं आता। राजाजी के जंगल से लगा हुआ इलाका था।

डबल्यू-डब्ल्यू-एफ और डबल्यूटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक जून 2016 से जून 2017 के बीच हरिद्वार-देहरादून के बीच मोतीचूर रेंज में 230 बार और हरिद्वार रेंज में 155 बार यानी कुल 385 बार हाथियों को रेलवे ट्रैक पर आने से रोका गया और स्टेशन अधीक्षक को अलर्ट भेजा गया।

ये ट्रेनें यदि 100 की रफ़्तार से चल रही होतीं तो ये अलर्ट कितने कारगर साबित होते?

उत्तराखंड में सड़क-रेल नेटवर्क के साथ बुनियादी ढांचे के विकास पर तेज़ी से कार्य हो रहा है। इसके लिए बड़ी मात्रा में कच्चा माल और अन्य वस्तुओं को ट्रांसपोर्ट कर ट्रेन के ज़रिये भी लाया जाता है। ट्रेनों का ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है। इसलिए वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय किये जाने जरूरी हैं। इसीलिए रेलवे ट्रैक और हाईवे पर ओवरपास- अंडरपास बनाए जाते हैं। ताकि हमारा विकास वन्यजीवों के रास्ते की बाधा न बने। वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र में धीमी रफ़्तार ट्रेन यात्रियों को भी कुछ अच्छे दृश्य देखने का मौका देगी। इसे मुनाफे-घाटे के सौदे से इतर देखा जाना चाहिए।

(देहरादून स्थित वर्षा सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

elephant
Dehradun
indian railways

Related Stories

इको-एन्ज़ाइटी: व्यासी बांध की झील में डूबे लोहारी गांव के लोगों की निराशा और तनाव कौन दूर करेगा

दिल्ली से देहरादून जल्दी पहुंचने के लिए सैकड़ों वर्ष पुराने साल समेत हज़ारों वृक्षों के काटने का विरोध

देहरादून: सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के कारण ज़हरीली हवा में जीने को मजबूर ग्रामीण

'विनाशकारी विकास' के ख़िलाफ़ खड़ा हो रहा है देहरादून, पेड़ों के बचाने के लिए सड़क पर उतरे लोग

असम में बिजली गिरने से 18 जंगली हाथियों की मौत, पोस्टमार्टम में हुई पुष्टि

क्या एयरपोर्ट बनाने के नाम पर देहरादून के थानो इलाके के 9 हज़ार से ज्यादा पेड़ काट दिए जाएंगे?

क्या अरब सागर को पार करते हैं चातक पक्षियों के दल?

जब 10 हज़ार पेड़ कट रहे होंगे, चिड़ियों के घोंसले, हाथियों के कॉरिडोर टूट रहे होंगे, आप ख़ामोश रहेंगे?


बाकी खबरें

  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Bappi Lahiri
    आलोक शुक्ला
    बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
    16 Feb 2022
    बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
  • hum bharat ke log
    वसीम अकरम त्यागी
    हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक
    16 Feb 2022
    जनवरी 2020 के बाद के कोरोना काल में मानवीय संवेदना और बंधुत्व की इन 5 मिसालों से आप “हम भारत के लोग” की परिभाषा को समझ पाएंगे, किस तरह सांप्रदायिक भाषणों पर ये मानवीय कहानियां भारी पड़ीं।
  • Hijab
    एजाज़ अशरफ़
    हिजाब के विलुप्त होने और असहमति के प्रतीक के रूप में फिर से उभरने की कहानी
    16 Feb 2022
    इस इस्लामिक स्कार्फ़ का कोई भी मतलब उतना स्थायी नहीं है, जितना कि इस लिहाज़ से कि महिलाओं को जब भी इसे पहनने या उतारने के लिए मजबूर किया जाता है, तब-तब वे भड़क उठती हैं।
  • health Department
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
    16 Feb 2022
    "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License