NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोई भी संस्थान आलोचना से परे होने की धारणा नुकसानदेह : एन रवि
‘‘व्यापक मुद्दा है कि क्या अदालतों की नैतिकता या ईमानदारी (स्केंडलाइज) पर सवाल उठाने के अपराध को कानून की किताब में बरकरार रखा जाना चाहिए...।”
भाषा
11 May 2019
एन. रवि

दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार एन रवि ने शुक्रवार को कहा कि किसी भी संस्था के आलोचना से परे होने और न्यायाधीशों की गरिमा और प्राधिकार को सामान्य समीक्षा एवं आलोचनात्मक टिप्पणियों से बचाव करते हुए उन्हें कायम रखने की धारणा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नुकसानदेह है।

समाचार पत्र द हिन्दू के पूर्व मुख्य संपादक एवं प्रकाशक ने कहा कि सार्वजनिक आलोचना से न्यायपालिका में जनता का विश्वास किसी न किसी प्रकार से डिग जाएगा, यह तर्क न्यायपालिका की ताकत एवं भरोसे के बारे में उपयुक्त सोच नहीं है। न्यायपालिका की शक्ति इसकी समुचित निष्पक्षता एवं उसके निर्णयों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।

समाचार समिति पीटीआई के चेयरमैन (अध्यक्ष) रवि दसवीं जिंदल ग्लोबल व्याख्यान श्रृंखला में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘न्याय प्रणाली की आलोचना पर अवमानना के आरोपों का इस्तेमाल हुआ है। अदालतों ने स्वयं न्यायाधीशों के निजी आचरण की खबरों एवं उनके प्रशासनिक कदमों की आलोचना पर अवमानना की कार्रवाई शुरू की है।’’

उन्होंने ‘‘भारतीय मीडिया की स्वतंत्रता, दायित्व एवं जवाबदेही’’ शीर्षक से दिये व्याख्यान में कहा, ‘‘व्यापक मुद्दा है कि क्या अदालतों की नैतिकता या ईमानदारी (स्केंडलाइज) पर सवाल उठाने के अपराध को कानून की किताब में बरकरार रखा जाना चाहिए। संस्थानों को आलोचना से परे रखने तथा न्यायाधीशों की शक्तियों को सामान्य समीक्षा एवं समीक्षात्मक टिप्पणियों से बचाव कर उनको कायम रखने संबंधी धारणा लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने वाली हैं।’’

उन्होंने कहा कि इस सन्दर्भ में यह महत्वपूर्ण होगा कि अधिक उदार कानूनों एवं उदार व्याख्या के लिए प्रयास करते समय समूची न्यायपालिका संस्थान में टकराव की धारणा से बचा जाना चाहिए।

रवि ने कहा, ‘‘न्यायपालिका ने अपने विभिन्न निर्णयों के माध्यम से मीडिया की स्वतंत्रता के बुनियादी ढांचे को सशक्त करने में मदद की है। यह भी समान रूप से सत्य है कि पूर्व काल में, जब न्यायपालिका ने न्यायिक उद्घघोषणा के जरिये स्वयं को मजबूत किया उससे भी पहले, जब कार्यपालिका का दबदबा था, मनमनानी नियुक्तिां, तबादले होते थे और प्रतिबद्ध न्यायपालिका की बात होती थी, तब मीडिया ने काफी हद तक न्यायपालिका की स्वतंत्रता के पक्ष में जनता की राय को तैयार किया।’’

उन्होंने कहा कि एक अन्य कानून जो अभिव्यक्ति के संदर्भ में अक्सर प्रयुक्त किया जाता है, वह है राजद्रोह। भले ही उपनिवेश दौर का यह अधिनियम कानून की किताब में है, अदालतों ने इसका उपयोग केवल उन मामलों में करने तक सीमित रखा जहां मंशा घृणा पैदा करने या हिंसा भड़काने अथवा सार्वजनिक अव्यवस्था कायम करने की थी।

रवि ने ध्यान दिलाया कि भारत विश्व के सबसे बड़े मीडिया बाजारों में से एक है। यहां विभिन्न भाषाओं में 70 हजार से अधिक पंजीकृत समाचारपत्र, 1600 केबल टेलीविजन स्टेशन और 38 करोड़ 40 लाख सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं।

n Ravi
journalist
judges
democracy
the hindu news paper
Indian judiciary
lecture
Indian justice system

Related Stories

2019 में हुआ हैदराबाद का एनकाउंटर और पुलिसिया ताक़त की मनमानी

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

Press Freedom Index में 150वें नंबर पर भारत,अब तक का सबसे निचला स्तर

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

ढहता लोकतंत्र : राजनीति का अपराधीकरण, लोकतंत्र में दाग़ियों को आरक्षण!

लोकतंत्र और परिवारवाद का रिश्ता बेहद जटिल है

प्रधानमंत्री जी! पहले 4 करोड़ अंडरट्रायल कैदियों को न्याय जरूरी है! 

किधर जाएगा भारत— फ़ासीवाद या लोकतंत्र : रोज़गार-संकट से जूझते युवाओं की भूमिका अहम

न्यायिक हस्तक्षेप से रुड़की में धर्म संसद रद्द और जिग्नेश मेवानी पर केस दर केस


बाकी खबरें

  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी सरकार के 8 साल: सत्ता के अच्छे दिन, लोगोें के बुरे दिन!
    29 May 2022
    देश के सत्ताधारी अपने शासन के आठ सालो को 'गौरवशाली 8 साल' बताकर उत्सव कर रहे हैं. पर आम लोग हर मोर्चे पर बेहाल हैं. हर हलके में तबाही का आलम है. #HafteKiBaat के नये एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार…
  • Kejriwal
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: MCD के बाद क्या ख़त्म हो सकती है दिल्ली विधानसभा?
    29 May 2022
    हर हफ़्ते की तरह इस बार भी सप्ताह की महत्वपूर्ण ख़बरों को लेकर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन…
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!
    29 May 2022
    गोडसे जी के साथ न्याय नहीं हुआ। हम पूछते हैं, अब भी नहीं तो कब। गोडसे जी के अच्छे दिन कब आएंगे! गोडसे जी का नंबर कब आएगा!
  • Raja Ram Mohan Roy
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या राजा राममोहन राय की सीख आज के ध्रुवीकरण की काट है ?
    29 May 2022
    इस साल राजा राममोहन रॉय की 250वी वर्षगांठ है। राजा राम मोहन राय ने ही देश में अंतर धर्म सौहार्द और शान्ति की नींव रखी थी जिसे आज बर्बाद किया जा रहा है। क्या अब वक्त आ गया है उनकी दी हुई सीख को अमल…
  • अरविंद दास
    ओटीटी से जगी थी आशा, लेकिन यह छोटे फिल्मकारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: गिरीश कसारावल्ली
    29 May 2022
    प्रख्यात निर्देशक का कहना है कि फिल्मी अवसंरचना, जिसमें प्राथमिक तौर पर थिएटर और वितरण तंत्र शामिल है, वह मुख्यधारा से हटकर बनने वाली समानांतर फिल्मों या गैर फिल्मों की जरूरतों के लिए मुफ़ीद नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License