NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
महात्मा का दूसरा पक्ष
अपने हर आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए गांधी जी एक तानाशाह नियुक्त करते थे और जब वह गिरफ्तार हो जाता था, तो उसकी जगह दूसरा तानाशाह ले लेता था।
सुभाषिनी सहगल अली
03 Sep 2018
Gandhi
Image Courtesy : Indian Express

अपने हर आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए गांधी जी एक तानाशाह नियुक्त करते थे और जब वह गिरफ्तार हो जाता था, तो उसकी जगह दूसरा तानाशाह ले लेता था। गांधी जी के चरित्र का यह तानाशाह पसंद पहलू नीलिमा डालमिया आधार की पुस्तक कस्तूरबा की गोपनीय डायरी पढ़ने के बाद कुछ हद तक समझ में आया। कस्तूर की शादी सात साल की उम्र में सात साल के मोहनदास से हुई थी और चौदह की उम्र में दोनों ने साथ रहना शुरू किया। दोनों का एक दूसरे के प्रति जबर्दस्त आकर्षण था।बुनियादी फर्क दोनों में यह था कि कस्तूरबा पतिव्रत धर्म के संस्कारों में पली थी और मोहनदास पुरुषप्रधानता की सोच में लिप्त थे। वह कस्तूर के शरीर, विचार, इच्छाओं और उसकी हर गतिविधि को अपने नियंत्रण में रखने पर तुले हुए थे। उन्हें कस्तूर का घर से बाहर निकलना इतना बुरा लगता था कि उसे मायके जाने की इजाजत मुश्किल से मिलती थी। एकाध बार बिना पूछे वह अपनी सास के साथ मंदिर चली गईं, तो मोहनदास को लगा कि वह आजाद होने की घोषणा कर रही है।

मोहनदास को घर से दूर जाना होता, तो इसकी चर्चा भी वह कस्तूर से करने की जरूरत महसूस नहीं करते थे। विलायत जाने के उनके फैसले की जानकारी कस्तूर को यात्रा की तैयारियां शुरू होने पर हुई। विलायत जाने के बाद मोहनदास बदल गए। अपनी इंद्रियों पर काबू पाने और अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए उन्होंने प्रयोगों की शुरुआत कर दी। प्रयोग करने का फैसला और दूसरों पर इन प्रयोगों को थोपना भी उनके जीवन की क्रिया बन गया।

मोहनदास ने अपनी शारीरिक इच्छाओं पर काबू पाने के कड़े संघर्ष के बारे में लिखा है। पर इसका जिक्र कम होता है कि उन्होंने बिल्कुल एकतरफा तरीके से अपने ब्रह्मचर्य के संकल्प में कस्तूर को बिना उसकी राय के शामिल कर लिया। शिक्षा के मामले में मोहनदास के लगातार प्रयोग का नतीजा यह हुआ कि उनके चारों बेटे काफी हद तक अशिक्षित ही बने रहे। इसका सबसे बुरा असर बड़े बेटे हरिलाल पर पड़ा। जब उसे पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भेजने का मौका आया, तो गांधी जी ने उसकी जगह अपने भतीजे को भेज दिया। बाद में उन्होंने उसे अपनी संपत्ति से भी अलग कर दिया। हरिलाल की कुंठा इस हद तक बढ़ गई कि वह शराबी बन गया। मोहनदास को उसके व्यवहार से कष्ट तो हुआ, पर उनके पास बड़े कामों में अपनी व्यस्तता थी। जबकि कस्तूर हर पल अपने बेटे के गुनाहों और अपने अनाथ जैसे पोतों-पोतियों के बारे में सोचकर दुखी रहती थी। मोहनदास ने दूसरे बेटे मणिलाल को सत्तरह की उम्र में बारह साल तक ब्रह्मचारी रहने का फैसला सुना दिया। यह कठोर सजा भुगतने के बाद जब वह अपने पिता के मित्र की बेटी से शादी करना चाहता था, तो उस पर भी पिता ने रोक लगा दी, क्योंकि लड़की मुस्लिम थी।

तीसरा बेटा देवदास मद्रास में काम करता था। वहां सी राजगोपालाचारी की बेटी से उसके प्रेम संबंध हुए, पर मोहनदास को यह संबंध स्वीकार नहीं था। अंतरजातीय विवाह के वह विरोधी थे। उन्होंने कहा कि दोनों को पांच साल तक इंतजार करना होगा। मोहनदास को महात्मा बनाने में कस्तूर का बड़ा हाथ था, वहीं कस्तूर को पूरे राष्ट्रीय आंदोलन की बा बनाने में पति का।
 
भारत छोड़ो आंदोलन में गिरफ्तार बा पुणे के आगा खान महल में बीमार पड़ी। वह उनका अंतिम संघर्ष था, पर उनके तानाशाह पति ने उन्हें पेनिसिलिन की सुई लगाने की अनुमति नहीं दी। बा नहीं बच पाईं। बा अपने पतिव्रत धर्म के प्रति अडिग रहीं और महात्मा अपने हठ के प्रति।

Courtesy: अमर उजाला,
Original published date:
30 Aug 2018
महात्मा गाँधी

Related Stories

भारत को हिंदु राष्ट्र बनाने का एक और प्रयासः एनएसयूआई

सरोकारों से विमुख होती पत्रकारिता

शीर्ष राजनेताओं के दल से इतर विचार

गौमांस: इतिहास और राजनीति

स्वच्छ भारत अभियान - एक वास्तविक पहल या मात्र दिखावा?


बाकी खबरें

  • भाषा
    हड़ताल के कारण हरियाणा में सार्वजनिक बस सेवा ठप, पंजाब में बैंक सेवाएं प्रभावित
    28 Mar 2022
    हरियाणा में सोमवार को रोडवेज कर्मी देशव्यापी दो दिवसीय हड़ताल में शामिल हुए जिससे सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बाधित हुईं। केंद्र की कथित गलत नीतियों के विरुद्ध केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त मंच ने…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: “काश! हमारे यहां भी हिंदू-मुस्लिम कार्ड चल जाता”
    28 Mar 2022
    पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल और इस्लामिक देश है। अब संकट में फंसे इमरान ख़ान के सामने यही मुश्किल है कि वे अपनी कुर्सी बचाने के लिए कौन से कार्ड का इस्तेमाल करें। व्यंग्य में कहें तो इमरान यही सोच रहे…
  • भाषा
    केरल में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत लगभग सभी संस्थान बंद रहे
    28 Mar 2022
    राज्य द्वारा संचालित केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की बसें सड़कों से नदारत रहीं, जबकि टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और निजी बसें भी राज्यभर में नजर नहीं आईं। ट्रक और लॉरी सहित वाणिज्यिक वाहनों के…
  • शिव इंदर सिंह
    विश्लेषण: आम आदमी पार्टी की पंजाब जीत के मायने और आगे की चुनौतियां
    28 Mar 2022
    सत्ता हासिल करने के बाद आम आदमी पार्टी के लिए आगे की राह आसन नहीं है। पंजाब के लोग नई बनी सरकार से काम को ज़मीन पर होते हुए देखना चाहेंगे।
  • सुहित के सेन
    बीरभूम नरसंहार ने तृणमूल की ख़ामियों को किया उजागर 
    28 Mar 2022
    रामपुरहाट की हिंसा ममता बनर्जी की शासन शैली की ख़ामियों को दर्शाती है। यह घटना उनके धर्मनिरपेक्ष राजनीति की चैंपियन होने के दावे को भी कमज़ोर करती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License