NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
इंडियाबुल्स को आरबीआई की 'क्लीन चिट' का सच क्या है?
सोमवार को कंपनी के शेयर की क़ीमत में अचानक बढ़ोतरी हुई और मीडिया के एक हिस्से ने इसे आरबीआई द्वारा दी गई क्लीन चिट का नतीजा बताया।
सौरोदिप्तो सान्याल
05 Mar 2020
Translated by महेश कुमार
India bulls

इंडियाबुल्स हाउसिंग फ़ाइनेंस लिमिटेड (आईबीएचएफ़एल) के शेयर मूल्य सोमवार को 14.84 प्रतिशत से बढ़कर 321.20 रुपये पर पहुंच गए थे। मुख्यधारा के मीडिया ने इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा इंडियाबुल्स हाउसिंग फ़ाइनेंस लिमिटेड को दी गई "क्लीन चिट" का नतीजा बताया है।

हालाँकि, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के एक कर्मचारी, अमिताभ दीपक द्वारा रिज़र्व बैंक (RBI) की ओर से 26 फ़रवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय (HC) में दायर एक जवाबी हलफ़़नामे से तो ऐसा नहीं लगता है। अपने हलफ़नामे में, आरबीआई ने "क्लीन चिट" वाक्य का कहीं भी प्रयोग नहीं किया है और न ही इस बात का उल्लेख किया है कि "कंपनी ने किसी भी क़ानून का उल्लंघन नहीं किया है", जैसा कि मीडिया में रिपोर्ट किया गया है।

सितंबर 2019 में दिल्ली हाई कोर्ट में सार्वजनिक हित में दायर एक रिट याचिका में आरोप लगाया गया था कि समीर गहलौत की अध्यक्षता में इंडियाबुल्स हाउसिंग फ़ाइनेंस ग्रुप ने हज़ारों करोड़ों रुपये का गबन किया है और उन्हौने दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर विभिन्न संस्थाओं के बीच जटिल लेनदेन के माध्यम से धनराशि को गबन करने के लिए गोल-गोल किया है, इन कंपनियों में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह और केपी सिंह की डीएलएफ़ है।

याचिका में पांच प्रमुख कॉरपोरेट समूहों पर आरोप लगाया गया है कि वे कथित कंपनियाँ धन को गोल-मोल करने में शामिल हैं। ये हैं: द अमेरिकॉर्प ग्रुप, रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी), चोरडिया ग्रुप, वाटिका ग्रुप और डीएलएफ़ ग्रुप। इंडियाबुल्स हाउसिंग पर द अमेरिकॉर्प ग्रुप में पांच कंपनियों को 151.90 करोड़ रुपये का ऋण देकर फंड को गोल-मोल करने का आरोप लगाया गया है, जिसे स्पेन के मैड्रिड में स्थित एक अनिवासी भारतीय हरीश फाबियानी द्वारा चलाया जाता है।

फैबियानी ने कथित रूप से अपनी कंपनियों, जसोल इन्वेस्टमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और जोइंद्रे फ़ाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से इंडियाबुल्स ग्रुप फ़र्मों में 254.87 करोड़ रुपये का निवेश किया है। रिलायंस (ADAG)  के साथ इंडियाबुल्स हाउसिंग फ़ाइनेंस लिमिटेड  के सौदे के बारे में भी इसी तरह के आरोप लगाए गए हैं। यह दावा किया गया कि अनिल अंबानी की अगुवाई में पांच कंपनियों को आईबीएचएफ़एल से 1,580 करोड़ रुपये का ऋण मिला है और इस राशि में से 570 करोड़ रुपये नौ कंपनियों में वापस लाए गए हैं, जो या तो सीधे या परोक्ष रूप से गहलोत के स्वामित्व में हैं या समूह की सहायक कंपनियों के माध्यम से प्रमोटड हैं। 

28 फ़रवरी को एक नियामक फाइलिंग (रेगुलटरी) में, इंडियाबुल्स ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया था, कि आरबीआई ने जन हित याचिका के मामले में अदालत में अपना हलफ़नामा प्रस्तुत किया है, और आरबीआई ने अपने हलफ़नामे में जन हित याचिका में दर्ज उधारकर्ताओं द्वारा लिए गए ऋणों का विवरण और भुगतान की तारीखों का उल्लेख भी किया है। इस तरह के ऋण, भारतीय रिज़र्व बैंक के हलफ़नामे में इंडियाबुल्स हाउसिंग फ़ाइनेंस के बारे में किसी भी प्रकार या प्रकृति के उल्लंघन का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके अलावा आरबीआई के हलफ़नामे में कहा गया है कि: इस लिए रेस्पोंडेंट (उत्तरदाता) यानी भारतीय रिज़र्व बैंक के ख़िलाफ़ रिट याचिका खरी नहीं उतरती है इसलिए इसे ख़ारिज कर दिया जाए।

हालाँकि, इंडियाबुल्स का दावा है कि आरबीआई ने "इंडियाबुल्स हाउसिंग फ़ाइनेंस के बारे में किसी भी प्रकार या प्रकृति का उल्लंघन नहीं किया है", कोई सही तस्वीर नहीं है क्यप्ङ्कि एफिडेविट के उल्लेख के अनुसार रिट याचिका में लगाए गए कई आरोपों में कंपनियों की जानकारी शामिल है जो आरबीआई के पास उपलब्ध नहीं थी। हलफ़नामे में कहा गया है, '' यह मामला उस अवधि से संबंधित है जिसमें हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनियों को पूरी तरह से विनियमित किया जा रहा था और इसकी देखरेख एनएचबी (नेशनल हाउसिंग बैंक) द्वारा की जा रही थी, आरबीआई के पास याचिका में इंडियाबुल्स के संबंध में उल्लिखित  पहलुओं के संबंध में बहुत सीमित जानकारी है जो जानकारी एनएचबी के पास उपलब्ध होनी चाहिए।”

हलफ़नामे की अंतिम पंक्ति स्पष्ट रूप से बताती है: कि "इसलिए, यह प्रस्तुत किया जाता है कि  माननीय न्यायालय इस रिट याचिका को जिसे 'भारतीय रिज़र्व बैंक के ख़िलाफ़' दर्ज किया गया है को ख़ारिज करने की कृपा कर सकता है।"

आरबीआई का हलफ़नामा वास्तव में इस बात पर रोशनी डालता है कि रिट याचिका में जो आरोप आरबीआई द्वारा सत्यापित किए जा सकता था, उनकी जांच की गई है और उन्हे काफी हद तक सही पाया गया है। 151.90 करोड़ रुपये के हिस्से के रूप में, जिसे कथित रूप से द अमेरिकॉर्प ग्रुप को उधार दिया गया था, और 39 करोड़ का कर्ज अमेरिकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। हलफ़नामे में आगे कहा गया है, कि “इस संबंध में, एनबीएफसी द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों की जांच के दौरान पाया गया था, जैसा कि रिट याचिका में उल्लेख किया गया है, आईबीएचएफएल ने वास्तव में 30 मार्च 2016 को अमेरिकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड को 39 करोड़ रुपये उधार दिए थे जैसा कि "एओए/एमओए और/या सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्य में परिभाषित उपयोग के अनुसार" परिवर्तनीय ब्याज दर पर।

आरबीआई को पता चला कि 39 करोड़ रुपये के ऋण की अदायगी 1 सितंबर, 2016 को इंडियाबुल्स हाउसिंग को कर दी गई थी। चूँकि अमेरिकॉर्प समूह को दी गई शेष राशि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के माध्यम से आरबीआई में पंजीकृत नहीं थी, इसलिए केंद्रीय बैंक द्वारा इसकी जांच नहीं की गई थी।

आरोप है कि 254.87 करोड़ रुपये को द अमरेकीकोर्प समूह ने अपनी एनसीएफसी, जसोल इंवेस्टमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और जोइंड्रे फ़ाइनेंस प्रा॰ लिमिटेड के माध्यम से निवेश किया है जो इंडियाबुल्स समूह की कंपनियों के उद्धृत और अनक्वॉटेड (अर्ध इक्विटी) इक्विटी शेयरों में भी सही पाया गया।

हलफ़नामे में यह भी कहा गया है कि आरबीआई ने पाया है कि अनिल अंबानी की अनिल धीरूभाई अंबानी समूह को 1,568 करोड़ रुपए दिए गए थे। रिट याचिका में आरोप लगाया गया था कि रिलायंस एडीएजी ने इंडियाबुल्स हाउसिंग से 1,580 करोड़ रुपये हासिल किए थे। यह देखा गया कि रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और रिलायंस कॉरपोरेट एडवाइजरी सर्विसेज लिमिटेड द्वारा कुल 570 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था, जिसमें इंडियाबुल्स समूह की कंपनियों की वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर में 0.001 प्रतिशत लिया गया था, जैसा कि रिट याचिका में आरोप लगाया गया था।

हलफ़नामे से यह स्पष्ट हो जाता है कि कई आरोपों की केंद्रीय बैंक द्वारा जांच नहीं की जा सकती थी क्योंकि यह जानकारी संस्था के पास उपलब्ध नहीं थी, लेकिन यह सुझाव देना कि  आरबीआई  ने इंडियाबुल्स को "क्लीन चिट" दे दी है, बहुत गलत है। इसके विपरीत, रिट याचिका में किए गए कई अवलोकनों और आरोपों को भारतीय रिज़र्व बैंक ने सही पाया है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

RBI Gives Clean Chit to Indiabulls? Not Really

RBI
IBHFL
IHFL
Indiabulls share price
RBI IBHFL

Related Stories

लंबे समय के बाद RBI द्वारा की गई रेपो रेट में बढ़ोतरी का क्या मतलब है?

आम आदमी जाए तो कहाँ जाए!

महंगाई 17 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर, लगातार तीसरे महीने पार हुई RBI की ऊपरी सीमा

रिपोर्टर्स कलेक्टिव का खुलासा: कैसे उद्योगपतियों के फ़ायदे के लिए RBI के काम में हस्तक्षेप करती रही सरकार, बढ़ती गई महंगाई 

आज़ादी के बाद पहली बार RBI पर लगा दूसरे देशों को फायदा पहुंचाने का आरोप: रिपोर्टर्स कलेक्टिव

RBI कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे: अर्थव्यवस्था से टूटता उपभोक्ताओं का भरोसा

नोटबंदी: पांच साल में इस 'मास्टर स्ट्रोक’ ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया

तबाही मचाने वाली नोटबंदी के पांच साल बाद भी परेशान है जनता

नोटबंदी की मार

तत्काल क़र्ज़ मुहैया कराने वाले ऐप्स के जाल में फ़ंसते नौजवान, छोटे शहर और गाँव बने टार्गेट


बाकी खबरें

  • Modi
    राज कुमार
    ‘दमदार’ नेता लोकतंत्र कमजोर करते हैं!
    07 Mar 2022
    हम यहां लोकतंत्र की स्थिति को दमदार नेता के संदर्भ में समझ रहे हैं। सवाल ये उठता है कि क्या दमदार नेता के शासनकाल में देश और लोकतंत्र भी दमदार हुआ है? इसे समझने के लिए हमें वी-डेम संस्थान की लोकतंत्र…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में क़रीब 22 महीने बाद 5 हज़ार से कम नए मामले सामने आए 
    07 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 4,362 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 54 हज़ार 118 हो गयी है।
  • Modi
    सुबोध वर्मा
    ज़्यादातर राज्यों में एक कार्यकाल के बाद गिरता है बीजेपी का वोट शेयर
    07 Mar 2022
    हालांकि 'डबल इंजन' वाली सरकारों को फ़ायदेमंद बताकर प्रचारित किया जाता है, मगर आंकड़े कुछ और ही बताते हैं।
  • New pension scheme
    न्यूज़क्लिक टीम
    New Pension Scheme पर गुस्सा फूटा, महंगाई मारक, मोदी मैजिक नहीं चला
    06 Mar 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने घोसी विधानसभा में अलग-अलग राजनीतिक दलों के समर्थकों से बात की। New Pension Scheme पर नाराजगी फूटी, बासफोर समाज में वंचना की मार, भाजपा को मोदी का भरोसा।
  • communalism
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोधरा, भाजपा और देश में बढ़ती सांप्रदायिकता
    06 Mar 2022
    कुछ ऐसी घटनाएं होती है जो न केवल समाज बल्कि पूरे देश की दिशा बदल देते हैं। उनमें से एक है गोधरा त्रासदी। इतिहास के पन्ने के इस अंक में नीलांजन बात कर रहे हैं उसी घटना की और कैसे गोधरा त्रासदी ने देश…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License